क्या सच में संभल में होगा भगवान कल्कि का जन्म? 68 तीर्थ, रहस्यमयी कुएं और अनोखी मान्यताएं

UP News: उत्तर प्रदेश का संभल शहर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. गंगा-रामगंगा नदियों के बीच बसा यह शहर 68 तीर्थों, 19 कुओं और 52 सराय का घर है, जो इसे एक खास आस्था का केंद्र बनाते हैं. यहाँ भगवान कल्कि के अवतार की मान्यता भी जुड़ी है.

UP News: उत्तर प्रदेश का संभल ऐसा शहर है...जिसकी पहचान सिर्फ पुराने इतिहास से नहीं बल्कि उसकी धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है. गंगा और रामगंगा नदियों के बीच बसा यह शहर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र माना जाता है. यहां आने वाले लोगों का मानना है कि इस धरती का हर कोना किसी न किसी धार्मिक कथा और मान्यता से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि संभल को एक खास धार्मिक नगरी के रूप में देखा जाता है. इसकी पहचान...तीन योजन विस्तार...वाले शहर के रूप में भी होती है...क्योंकि मान्यता है कि यहां से गंगा और रामगंगा दोनों लगभग तीन-तीन योजन की दूरी पर स्थित हैं.

संभल में 68 तीर्थ, 19 कुएं और 52 सराय, आस्था की अनोखी पहचान

संभल की खास बात सिर्फ इसकी भौगोलिक स्थिति नहीं है...बल्कि यहां मौजूद धार्मिक स्थलों की बड़ी संख्या भी इसे अलग पहचान देती है. शहर में 68 तीर्थ, 19 कुएं, 36 पूरे और 52 सराय बताए जाते हैं. इन सभी स्थानों का अपना अलग धार्मिक और सामाजिक महत्व है. दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. लोगों का विश्वास है कि इन पवित्र स्थानों पर आने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यही कारण है कि सालभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.

क्या संभल में होगा भगवान कल्कि का अवतार? धार्मिक मान्यता से जुड़ा हैं  विश्वास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कल्कि का जन्म जिस स्थान पर होगा...वह गंगा और रामगंगा के बीच स्थित होगा. इसी वजह से संभल को उस पवित्र स्थान के रूप में देखा जाता है. इस मान्यता ने इस शहर की धार्मिक पहचान को और भी मजबूत बना दिया है. यहां आने वाले श्रद्धालु इस आस्था को पूरे विश्वास के साथ मानते हैं और इस धरती को बेहद पवित्र मानते हैं.

सप्तसागर कूप से कृष्ण कूप तक, संभल के पवित्र कुओं से जुड़ी हैं अनोखी मान्यताएं

संभल के तीर्थों और कुओं से भी कई खास मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. तीर्थ उस स्थान को माना जाता है, जहां पानी... कुंड और मंदिर तीनों मौजूद हों. शहर के कई पुराने कुओं को लेकर आज भी लोगों में गहरी आस्था है. माना जाता है कि सप्तसागर कूप में सात समुद्रों का जल एकत्र है. वहीं कृष्ण कूप को वह स्थान माना जाता है... जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरणों का धुला हुआ जल मौजूद है. इन मान्यताओं के कारण ये स्थान सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

सराय और पूरे सुनाते हैं सदियों पुराना इतिहास, ऐसे बसा था यह शहर

संभल में मौजूद सराय और पूरे भी शहर के पुराने समय की कहानी सुनाते हैं. पहले के दौर में जब लोग लंबी यात्राएं करते थे...तब इन्हीं सरायों में ठहरते थे. धीरे-धीरे इन सरायों और पुरों के आसपास बस्तियां बसती चली गईं और शहर का विस्तार होता गया. आज भी ये स्थान संभल के पुराने इतिहास और उस समय की जीवनशैली की याद दिलाते हैं.

आस्था, इतिहास और विरासत का संगम है संभल, आज भी श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र

संभल सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और इतिहास का ऐसा संगम है...जिसने अपनी पहचान सदियों से संभालकर रखी है. गंगा और रामगंगा के बीच बसा यह क्षेत्र आज भी धार्मिक मान्यताओं, पुराने तीर्थों, ऐतिहासिक कुओं और सरायों के कारण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. अगर इस विरासत को सही तरीके से सहेजकर रखा जाए...तो आने वाली पीढ़ियां भी इस अनमोल धरोहर को करीब से जान सकेंगी और इसका महत्व हमेशा बना रहेगा.

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Published by: Lucky Kumari

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