UP News: प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने संगम क्षेत्र के कई हिस्सों को प्रभावित किया है. घाटों, रास्तों और निचले इलाकों तक पानी पहुंच चुका है. इसी बीच झूंसी पुल के नीचे बाढ़ से घिरे एक मचान की तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है. मचान का निचला हिस्सा पानी की चपेट में है, लेकिन करीब 80 फीट ऊपर शीशे से सुरक्षित जगह पर अखंड ज्योति लगातार जल रही है. आखिर इस ज्योति की देखरेख कौन करता है और बाढ़ के बीच ‘मचान वाले बाबा’ यहां कैसे पहुंचते हैं? जानिए आस्था की इस अनोखी कहानी.
गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर से संगम क्षेत्र प्रभावित
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. संगम क्षेत्र और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ी है. इसी बाढ़ के बीच झूंसी पुल के नीचे बना एक मचाननुमा आश्रम भी पानी से घिर गया है. आसपास का इलाका जलमग्न है और मचान के निचले हिस्से पर भी बाढ़ का असर पड़ा है. लेकिन इस दृश्य में सबसे ज्यादा ध्यान ऊपर जल रही अखंड ज्योति खींच रही है.
करीब 80 फीट ऊपर शीशे के भीतर जल रही लौ
मचान के ऊपर एक ऊंचा लोहे का खंभा लगा है. इसके ऊपरी हिस्से में शीशे से सुरक्षित स्थान बनाया गया है. यहीं अखंड ज्योति स्थापित है. मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार, यह ज्योति करीब 80 फीट की ऊंचाई पर जल रही है. चारों तरफ बाढ़ का पानी है. नीचे का इलाका जलमग्न है. इसके बावजूद ऊंचाई पर जल रही यह लौ लगातार दिखाई दे रही है.
कौन हैं ‘मचान वाले बाबा’?
इस अखंड ज्योति की सेवा रामदास महाराज करते हैं. श्रद्धालुओं के बीच उनकी पहचान ‘मचान वाले बाबा’ के नाम से है. रिपोर्टों के अनुसार, वे लंबे समय से इस मचान और अखंड ज्योति की सेवा से जुड़े हैं. श्रद्धालु उन्हें देवरहा बाबा का शिष्य बताते हैं. माघ मेला और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भी यह मचान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है.
रास्ता डूबने पर नाव से पहुंचते हैं बाबा
बाढ़ के दौरान मचान तक पहुंचने वाला रास्ता पानी में डूब जाता है. ऐसे में रामदास महाराज नाव के जरिए वहां पहुंचते हैं. वह अखंड ज्योति की देखरेख करते हैं और उसमें घी डालते हैं. सामान्य दिनों में जहां आसानी से पहुंचा जा सकता है, वहीं बाढ़ के दौरान नाव का सहारा लेना पड़ता है.
देसी घी से जलती है अखंड ज्योति
अखंड ज्योति में देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है. इसे ऐसी व्यवस्था के साथ स्थापित किया गया है कि कुछ समय तक वहां किसी के न पहुंच पाने की स्थिति में भी ज्योति जलती रह सके. रामदास महाराज के अनुसार, यह ज्योति देश के कल्याण, धर्म की रक्षा और मानव कल्याण के उद्देश्य से जलाई गई है. बाढ़ जैसी कठिन परिस्थितियों में भी इसकी सेवा जारी रखने की कोशिश की जाती है.
सालभर बना रहता है मचान
संगम क्षेत्र में माघ मेला और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संतों के शिविर और पंडाल लगाए जाते हैं. आयोजन खत्म होने के बाद अधिकांश अस्थायी पंडाल हटा दिए जाते हैं. लेकिन झूंसी पुल के नीचे स्थित यह मचान लंबे समय से मौजूद है. इसी वजह से यह स्थान श्रद्धालुओं के बीच अलग पहचान रखता है.
बाढ़ के बीच कायम है आस्था की लौ
प्रयागराज में बाढ़ और बढ़ते जलस्तर के बीच कई इलाके प्रभावित हैं. मचान के आसपास भी पानी पहुंच चुका है और वहां तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस पूरी तस्वीर के बीच ऊंचाई पर शीशे के सुरक्षित घेरे में जलती अखंड ज्योति अब भी दिखाई दे रही है. नीचे बाढ़ का पानी है और आसपास का इलाका जलमग्न है. वहीं, ऊपर लगातार जलती यह लौ श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास की एक अलग तस्वीर बन गई है.
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