नोएडा बनेगा ‘सेफ सिटी’, 2200 कैमरों से होगी चप्पे-चप्पे की निगरानी , फेस डिटेक्शन से पकड़े जाएंगे संदिग्ध? जानें पूरा सिस्टम

UP News: नोएडा को सुरक्षित बनाने के लिए 217 करोड़ रुपये का ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है. इसमें 2200 आधुनिक कैमरे लगेंगे और फेस डिटेक्शन जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा. यह प्रोजेक्ट शहर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

UP News: नोएडा को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. शहर में अब 217 करोड़ रुपये की लागत से ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट लागू करने की तैयारी है. इसके तहत 2200 आधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे. खास बात यह है कि इन कैमरों को शहर में पहले से लगे करीब 20 हजार निजी और संस्थागत CCTV कैमरों से भी जोड़ा जाएगा. यानी निगरानी का दायरा सिर्फ प्रमुख सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहर के अंदरूनी इलाकों पर भी नजर रखी जा सकेगी.

घर से लेकर मॉल और स्कूल तक कैमरों की निगरानी

सेफ सिटी योजना के तहत ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, घरों, दुकानों, अस्पतालों, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक स्थलों, बाजारों, मॉल और औद्योगिक क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों को निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. इससे पुलिस को शहर की मुख्य सड़कों के साथ-साथ गलियों और संवेदनशील इलाकों पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी.

सेक्टर-94 में बनेगा नया कंट्रोल रूम

सेफ सिटी प्रोजेक्ट के लिए सेक्टर-94 में बने आईटीएमएस के ऊपर एक नया कंट्रोल रूम तैयार किया जाएगा. इसे मौजूदा कंट्रोल रूम और पुलिस मुख्यालय से जोड़ा जाएगा. किसी भी घटना की सूचना मिलने पर संबंधित थाना, चौकी, पीआरवी और डायल-112 को तुरंत जानकारी भेजने की व्यवस्था रहेगी.

फेस डिटेक्शन से संदिग्धों पर भी नजर

इस पूरे सिस्टम में फेस डिटेक्शन जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज संदिग्ध या वांछित व्यक्ति अगर किसी कैमरे के सामने आता है तो उसकी पहचान और लोकेशन कंट्रोल रूम में दिखाई दे सकेगी. इसके अलावा पैन-टिल्ट-जूम यानी PTZ कैमरों को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकेगा. इन कैमरों की मदद से करीब 1700 मीटर तक की दूरी की फुटेज भी देखी जा सकेगी.

जल्द जारी होगा RFP, एक साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

नोएडा प्राधिकरण जल्द ही सेफ सिटी प्रोजेक्ट के लिए RFP जारी करेगा. इसके करीब 10 दिन बाद प्री-बिड बैठक आयोजित करने की तैयारी है. वहीं लगभग डेढ़ महीने में काम आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है. पूरे प्रोजेक्ट को एक साल के भीतर पूरा करने की योजना है. सिस्टम शुरू होने के बाद इसे संचालित करने के लिए संबंधित कंपनी पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग भी देगी. इससे नई तकनीक और निगरानी व्यवस्था को पुलिस सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा.

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By लक्की कुमारी

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