न नौकरी से करोड़पति बना, न कभी कारोबार किया, फिर भी कानपुर के गार्ड को थमा दिया 3.14 करोड़ का नोटिस

UP News: कानपुर में एक सिक्योरिटी गार्ड के नाम पर करोड़ों का कारोबार करने का मामला सामने आया है. 10 हजार की नौकरी करने वाले युवक को 3.14 करोड़ का टैक्स नोटिस मिला, जिससे उसकी नौकरी और राशन कार्ड छिन गया. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

UP News: कानपुर में महज 10 हजार रुपये की नौकरी करने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड के नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार किए जाने का मामला सामने आया है. युवक को उसके नाम से चल रही फर्म के संबंध में 3.14 करोड़ रुपये से अधिक टैक्स जमा करने का सीजीएसटी नोटिस मिला तो उसके होश उड़ गए. नोटिस के बाद नौकरी चली गई और राशन कार्ड भी निरस्त हो गया. करीब एक साल तक अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद अब पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

नोटिस से खुला फर्म और करोड़ों के कारोबार का राज

आवास विकास हंसपुरम निवासी ओमजी शुक्ला को 21 अगस्त 2025 को सीजीएसटी का नोटिस मिला था. नोटिस में उनके ऊपर 3 करोड़ 14 लाख 56 हजार रुपये से अधिक का टैक्स बकाया बताया गया. ओमजी के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्हें अपने नाम पर किसी कारोबार की जानकारी ही नहीं थी. नोटिस में सामने आया कि उनके नाम से ‘ओम इंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म वर्ष 2023 में पंजीकृत कराई गई. इस फर्म के जरिए कपड़ों का कारोबार किया गया और कारोबार का कुल टर्नओवर करीब 17.47 करोड़ रुपये बताया गया. ओमजी का कहना है कि उन्होंने न तो यह फर्म खोली और न ही इस तरह का कोई कारोबार किया.

सीजीएसटी कार्यालय के चक्कर लगाते रहे ओमजी

नोटिस मिलने के बाद ओमजी व्यापारियों के साथ कानपुर स्थित सीजीएसटी कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी. उनका कहना है कि उन्हें बताया गया कि नोटिस दिल्ली से जारी हुआ है, इसलिए उन्हें वहीं संपर्क करना होगा. इसके बाद वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. करीब एक साल से परेशान ओमजी मंगलवार को पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से मिले और पूरा मामला उनके सामने रखा. पुलिस आयुक्त के आदेश के बाद नौबस्ता पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है.

नौकरी गई, अब डिलीवरी से चला रहे घर

ओमजी ने बताया कि वह काकादेव स्थित एक कोचिंग संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे और करीब 10 हजार रुपये महीना कमाते थे. उनके नाम से करोड़ों के कारोबार और सीजीएसटी नोटिस की खबर सामने आने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. इसके बाद उनका राशन कार्ड भी निरस्त हो गया, जिससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया. नौकरी जाने के बाद अब ओमजी जोमैटो में डिलीवरी बॉय का काम कर रहे हैं. उनके पिता फरीदाबाद की एक दवा फैक्ट्री में काम करते हैं, जबकि उनकी मां भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करती थीं. नोटिस मिलने के बाद से उनकी मां भी मानसिक रूप से परेशान रहने लगीं और अब नौकरी नहीं कर रही हैं.

पुलिस को मिलीभगत का शक, क्राइम ब्रांच करेगी जांच

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि सिक्योरिटी गार्ड के नाम पर फर्म का पंजीकरण कराया गया है तो पंजीकरण के दौरान जांच क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का विषय है. प्रथम दृष्टया मामले में मिलीभगत की आशंका जताई गई है. अब क्राइम ब्रांच यह पता लगाएगी कि ओमजी के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्म किसने बनवाई, फर्म के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार किसने किया और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं. पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी.

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By अंजली कश्यप

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