UP News: रक्षाबंधन के मौके पर कानपुर में एक ऐसा भावुक पल सामने आया, जिसने प्रशासन और आम लोगों के रिश्ते की नई तस्वीर पेश की. जनता दर्शन में अपनी मां के साथ पहुंची कक्षा 12 की छात्रा इशु यादव ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की कलाई पर राखी बांधी. छात्रा की आर्थिक परेशानी जानने के बाद डीएम ने भी भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी में मदद का भरोसा दिया.
आर्थिक तंगी से जूझ रही थी छात्रा
नौबस्ता के आवास विकास हंसपुरम निवासी इशु यादव अपनी मां ललिता यादव के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची थी. मां ने बताया कि परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है. इशु के पिता का वर्ष 2017 में निधन हो चुका है. परिवार की जिम्मेदारी मां पर है, जो घरों में काम कर किसी तरह परिवार का खर्च चलाती हैं. आर्थिक तंगी के कारण इशु की कई महीनों की स्कूल फीस जमा नहीं हो सकी थी और करीब 29 हजार रुपये बकाया हो गए थे.
डीएम ने भरवाई फीस, बाकी भी माफ कराई
छात्रा की परेशानी सुनने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्कूल प्रबंधन से बात की. बकाया फीस की आधी राशि यानी करीब 14,500 रुपये डीएम ने स्वयं जमा की, जबकि बाकी आधी फीस स्कूल प्रबंधन से माफ करा दी गई. इससे इशु की पूरी बकाया फीस का संकट दूर हो गया और उसकी पढ़ाई जारी रखने का रास्ता साफ हो गया.
स्कूल जाने के लिए साइकिल भी मिली
डीएम ने इशु से उसकी पढ़ाई के साथ स्कूल आने-जाने की परेशानी के बारे में भी पूछा. पता चला कि उसका घर स्कूल से करीब दो किलोमीटर दूर है और उसे आने-जाने में दिक्कत होती है. इस पर डीएम ने उसके लिए साइकिल की व्यवस्था कराई. 27 अगस्त को इशु को साइकिल भी मिल गई.
राखी बांधकर बोली- आईएएस बनकर करूंगी लोगों की मदद
रक्षाबंधन पर डीएम की कलाई पर राखी बांधने के बाद इशु ने अपने सपने के बारे में भी बताया. वह आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है. छात्रा ने कहा कि अधिकारी बनने के बाद वह जरूरतमंद लोगों की समस्याएं सुनेगी और उनकी मदद करेगी. डीएम ने उसका हौसला बढ़ाते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने की सलाह दी.
डिप्टी कलेक्टर करेंगी इशु की मेंटरिंग
इशु के सपने को देखते हुए डीएम ने डिप्टी कलेक्टर ज्योति शर्मा को उसकी मेंटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी है. वह पढ़ाई और आगे की तैयारी में छात्रा का मार्गदर्शन करेंगी. इस तरह रक्षाबंधन पर बंधी राखी सिर्फ एक औपचारिक रिश्ता नहीं रही, बल्कि इशु की पढ़ाई और उसके आईएएस बनने के सपने के लिए नई उम्मीद बन गई.
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