तारीख पर तारीख... 23 दोषियों को फांसी सुना चुके जज का सवाल से बवाल, 97 केस रिकॉल पर रवि कुमार दिवाकर बोले- ‘न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए’

UP News: मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में एक एनडीपीएस मामले में फैसला सुनाते हुए जज रवि कुमार दिवाकर ने 97 हत्या के मामलों की पत्रावलियां रिकॉल किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में न्याय और न्यायाधीश के अधिकारों पर गंभीर टिप्पणी की.

UP News: मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में करीब 10 साल पुराने एनडीपीएस एक्ट के मामले में फैसला सुनाते हुए जज रवि कुमार दिवाकर ने अपनी अदालत से हत्या के 97 मामलों की पत्रावलियां रिकॉल किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. अदालत ने साक्ष्य पर्याप्त नहीं मिलने पर आरोपी अशोक भारती को दंड से मुक्त कर दिया. इसी फैसले में जज दिवाकर ने न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई सवाल भी दर्ज किए.

18 अगस्त को 97 पत्रावलियां की गई थीं रिकॉल

मामला उन 97 हत्या के मामलों से जुड़ा है, जिनकी पत्रावलियां 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने रिकॉल की थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, जज रवि कुमार दिवाकर ने नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर में पदभार संभाला था. इसके बाद उनकी अदालत में कई गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई हुई. बाद में उनकी अदालत से हत्या के 97 मामलों की पत्रावलियां वापस लिए जाने का मामला सामने आया.

23 दोषियों को सुना चुके हैं फांसी की सजा

जज रवि कुमार दिवाकर नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर में तैनात हुए थे. इसके बाद उनकी अदालत ने कई गंभीर आपराधिक मामलों में फैसले सुनाए. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके कार्यकाल के कुछ ही महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई. इसके बाद उनकी अदालत में लंबित हत्या के 97 मामलों की पत्रावलियां रिकॉल किए जाने का मामला सामने आया. अब इन्हीं 97 मामलों की फाइलें वापस लिए जाने की प्रक्रिया पर जज दिवाकर की टिप्पणी चर्चा में है.

फैसले में उठा न्यायाधीश के अधिकार का सवाल

जज दिवाकर ने फैसले में सवाल किया कि न्यायाधीश का दायित्व न्याय करना है, लेकिन अगर उसी न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए? उन्होंने यह भी सवाल रखा कि जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाला न्यायाधीश क्या ऐसे आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है, जिसे वह कानून के विपरीत मानता हो. ये टिप्पणियां 97 पत्रावलियों को रिकॉल किए जाने की प्रक्रिया के संदर्भ में दर्ज की गई हैं.

धारा 409 का भी किया गया उल्लेख

फैसले में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 409 का उल्लेख किया गया है. इसके तहत जिला जज को किसी मामले को रिकॉल करने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई है. हालांकि, जज दिवाकर ने धारा 409(2) का उल्लेख करते हुए उन मामलों की स्थिति पर भी सवाल उठाया, जिनमें ट्रायल शुरू हो चुका हो और मामला ‘पार्ट हर्ड केस’ की स्थिति में हो. इसी कानूनी स्थिति के आधार पर उन्होंने अपनी अदालत से मामलों की पत्रावलियां वापस लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए.

तारीख पर तारीख’ का भी आया जिक्र

एनडीपीएस मामले के फैसले में जज दिवाकर ने लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का जिक्र करते हुए फिल्म ‘दामिनी’ के चर्चित संवाद ‘तारीख पर तारीख’ का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अदालतों में लगातार तारीख मिलने और न्याय में देरी को लेकर यह संवाद काफी चर्चित रहा है. जज दिवाकर की ताजा टिप्पणी 97 हत्या के मामलों की पत्रावलियां रिकॉल किए जाने के मुद्दे को लेकर सामने आई है.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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