बलिया में बारिश ने खोली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की पोल, सड़क से सटे 10 मीटर गहरे गड्ढे से मचा हड़कंप

UP News: बलिया में तेज बारिश ने निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़क किनारे बने विशाल गड्ढे ने स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा दी है. जल निकासी व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन की ओर से जांच की जा रही है.

UP News: सोमवार दोपहर हुई तेज बारिश के बाद बैरिया तहसील क्षेत्र में निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये हैं. टोला सिवन राय-मांझी मार्ग पर चांददियर चौराहे से करीब 50 मीटर पहले सड़क किनारे अचानक करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बन गया. सड़क से बेहद करीब जमीन धंसने की घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गयी. ग्रामीणों को आशंका है कि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किये गये तो बड़ा हादसा हो सकता है.

सड़क के करीब जमीन धंसने से बढ़ी चिंता

बारिश के बाद सड़क किनारे इतनी गहराई तक जमीन धंसने से निर्माणाधीन सड़क की मिट्टी भराई, मजबूती और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के किनारे बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किये गये हैं. पानी जमीन के अंदर जाने से मिट्टी कमजोर हो रही है और इसके कारण जमीन धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं. गड्ढा सड़क के काफी नजदीक होने के कारण रात में खतरा और बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे में दोपहिया वाहन चालक या राहगीर इसकी चपेट में आ सकता है.


पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

टोला बज राय निवासी सेवानिवृत्त सेना कर्मी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 11 माह पहले चांददियर चौराहे और कारगिल पेट्रोल पंप के बीच निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर दो जगह सड़क के नीचे इसी तरह बड़े गड्ढे बने थे. उस दौरान एक साइकिल सवार गड्ढे में गिरकर घायल हो गया था. आसपास के लोगों ने उसे बाहर निकालकर उसकी जान बचायी थी. इब्राहिमाबाद निवासी रविकांत सिंह ने बताया कि करीब एक माह पहले मैथ योगेंद्र गिरी के पास सड़क के बीच करीब 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया था. इसके बाद वहां दोबारा खुदाई कर पानी की निकासी के लिए पुलिया निर्माण का काम कराया जा रहा है.

बार-बार धंस रही जमीन, सवालों में जल निकासी

ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आने के बावजूद जल निकासी और मिट्टी की मजबूती को लेकर स्थायी समाधान नहीं किया गया. उनका कहना है कि अगर निर्माण के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी तो आने वाले दिनों में सड़क के अन्य हिस्सों में भी जमीन धंसने का खतरा बना रहेगा. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, सड़क की गुणवत्ता की जांच करने और जल निकासी की व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है.

परियोजना निदेशक ने कहा- मौके पर चल रहा काम

एनएचएआई के परियोजना निदेशक पीयूष अग्रवाल ने बताया कि मौके पर काम कराया जा रहा है और कार्यदायी संस्था को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं. वहीं, प्रोजेक्ट मैनेजर से मामले को लेकर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. लगातार जमीन धंसने की घटनाओं ने निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. अब देखना होगा कि जिम्मेदार एजेंसियां मौके पर क्या तकनीकी कदम उठाती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था करती हैं.

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लेखक के बारे में

By तिलक कुमार

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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