UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक की जिम्मेदारी तो मिल गई, लेकिन अब मानदेय को लेकर झटका लगा है. प्रशासक के रूप में काम कर रहे ग्राम प्रधानों को पांच हजार रुपये प्रतिमाह मिलने वाला मानदेय नहीं मिलेगा. ऐसे में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रशासक बनाए गए प्रधानों के लिए यह अहम अपडेट है. आखिर ग्राम प्रधानों का मानदेय क्यों बंद हुआ और ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर अब क्या नया अपडेट सामने आया है, आइए जानते हैं-
14 अगस्त को हाई कोर्ट में सुनवाई
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2026 में होने हैं, लेकिन पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण चुनाव में देरी हो रही है. पंचायत चुनाव में हो रही देरी का मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है. कोर्ट ने सरकार से आरक्षण प्रक्रिया में देरी को लेकर जवाब भी मांगा है. अब इस मामले में 14 अगस्त को हाई कोर्ट में अगली सुनवाई होगी. कोर्ट की सुनवाई पर सरकार और पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे लोगों की नजरें टिकी हैं.
ओबीसी आरक्षण पर टिकी चुनाव की तैयारी
प्रदेश में कुल 58,213 ग्राम पंचायतें, 827 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं. पंचायत चुनाव के लिए पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया अहम है और इसके पूरा होने के बाद ही चुनाव की तस्वीर साफ होगी. हाई कोर्ट के रुख के बाद राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग पर ओबीसी आंकड़ों के सर्वे और आरक्षण प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का दबाव बढ़ गया है. अब 14 अगस्त की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि पंचायत चुनाव की तैयारियां किस दिशा में आगे बढ़ेंगी. यह भी पढ़ें: UP पंचायत चुनाव को लेकर अपडेट! हाईकोर्ट के आदेश से बढ़ी हलचल, क्या नवंबर से पहले होगा इलेक्शन? जानिए सच
