UP News: राजधानी लखनऊ से होकर गुजरने वाली गोमती नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत अब गोमती में गिरने वाले 45 नालों के सीवेज का प्रबंधन किया जाएगा. इसके लिए नालों की टैपिंग, सीवेज का फ्लो डायवर्ट करने के साथ मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने और नए एसटीपी लगाने की तैयारी है.
ड्रोन सर्वे में मिले 12 नए नाले
गोमती में गिरने वाले नालों को लेकर हुए ड्रोन सर्वे में 12 नए नालों की पहचान हुई है. इससे पहले नगर निगम के रिकॉर्ड में ऐसे 33 नालों का उल्लेख था. अब कुल 45 नालों के सीवेज को लेकर कार्ययोजना बनाई गयी है.
28 नालों से निकल रहा करीब 260 एमएलडी डिस्चार्ज
आंकड़ों के मुताबिक 12 नालों से करीब 75 एमएलडी डिस्चार्ज पहले ही टैप किया जा चुका है. वहीं पांच नालों में टैपिंग की जरूरत नहीं पायी गयी. सबसे बड़ी चुनौती 28 अनटैप्ड और आंशिक रूप से टैप्ड नाले हैं, जिनसे करीब 260 एमएलडी डिस्चार्ज निकल रहा है. इसे एसटीपी तक पहुंचाकर शोधित करने की योजना है.
चार बड़े एसटीपी से जोड़ा जाएगा सीवेज
गोमती पुनरुद्धार की प्रस्तावित योजना में अलग-अलग नालों के सीवेज को बड़े एसटीपी से जोड़ने का खाका तैयार किया गया है. इसके तहत बसंतकुंज में 160 एमएलडी, जियामऊ में 150 एमएलडी तथा वजीरगंज और नीलमथा में 65-65 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी प्रस्तावित हैं. इसके अलावा पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता वाले मॉड्यूलर एसटीपी भी प्रस्तावित हैं.
भरवारा और दौलतगंज एसटीपी का भी होगा अपग्रेडेशन
योजना में मस्तेमऊ में नेचर बेस्ड तकनीक के इस्तेमाल के साथ भरवारा और दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन को भी शामिल किया गया है. 39 एमएलडी क्षमता वाले एक एसटीपी का निर्माण नवंबर 2024 में पूरा हो चुका है. वहीं बरीकलां और लोनियापुरवा एसटीपी से नालों को जोड़ने की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है.
45.56 लाख आबादी, 880 एमएलडी से ज्यादा डिस्चार्ज
2026 के अनुमान के अनुसार लखनऊ की आबादी करीब 45.56 लाख है. शहर में लगभग 7.52 लाख घर हैं, जिनमें करीब 53.32 फीसदी घर सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं. आंकड़ों के अनुसार घरेलू सीवेज उत्पादन करीब 546.77 एमएलडी है, जबकि वास्तविक डिस्चार्ज करीब 880.70 एमएलडी बताया गया है. इसमें 690.33 एमएलडी नालों और 190.71 एमएलडी सीवर नेटवर्क के जरिये प्रवाहित होता है.
एनएमसीजी को भेजी जा चुकी है पुनरुद्धार योजना
गोमती के समेकित पुनरुद्धार की प्रस्तावित कार्ययोजना की रिपोर्ट 6 मई 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भेजी जा चुकी है. अब नालों की टैपिंग और सीवेज को शोधन संयंत्रों तक पहुंचाने की कार्रवाई के जरिये गोमती में सीधे गिरने वाले प्रदूषित पानी को रोकने पर जोर है.
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