UP News: सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सितंबर का महीना अहम हो सकता है. पिछले कुछ दिनों में सोने के भाव में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट या स्थिरता को लंबे समय की तेजी का अंत नहीं माना जा सकता. अमेरिका की मौद्रिक नीति, डॉलर की चाल, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सोने में खरीदारी आगे कीमतों की दिशा तय करने वाले बड़े कारक रहेंगे.
आज भी सोने-चांदी में दिखी हलचल
4 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,467 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा. वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स गोल्ड अक्टूबर फ्यूचर्स करीब 1,55,250 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा. हाल की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर सतर्कता भी बनी हुई है. इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमत सीधी रेखा में बढ़ने के बजाय बीच-बीच में गिरावट भी दिखा सकती है.
एक्सपर्ट बोले- गिरावट में खरीदारी पर नजर
LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक सोने का तकनीकी आउटलुक फिलहाल सकारात्मक दिखाई दे रहा है. उनके अनुसार एमसीएक्स गोल्ड में 1,55,000-1,55,200 रुपये के आसपास का स्तर खरीदारी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. उन्होंने 1,53,400 रुपये के नीचे स्टॉप-लॉ रखते हुए 1,57,200 रुपये के लक्ष्य की बात कही है. यानी एक्सपर्ट की राय में मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट में खरीदारी का मौका बन सकता है.
सितंबर में क्यों बढ़ सकते हैं सोने के दाम?
सोने की कीमतों पर इस समय कई अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर है. अमेरिका के रोजगार आंकड़े, महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी नीति बाजार की दिशा बदल सकती है. ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है तो आम तौर पर सोने को समर्थन मिलता है, जबकि ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने पर दबाव डाल सकते हैं. इसके अलावा मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तरफ आकर्षित कर सकता है.
यूपी में क्या होगा असर?
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा और मेरठ समेत यूपी के सराफा बाजारों में सोने का खुदरा भाव अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, स्थानीय मांग, मेकिंग चार्ज और टैक्स के कारण अलग-अलग हो सकता है. त्योहारी और शादी के सीजन में मांग बढ़ने पर खुदरा बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है. इसलिए अगर किसी परिवार को आने वाले महीनों में शादी या अन्य समारोह के लिए सोना खरीदना है तो बाजार में अचानक बड़ी तेजी आने का इंतजार करने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी पर विचार किया जा सकता है.
चांदी में भी तेजी की गुंजाइश, लेकिन जोखिम ज्यादा
सोने के साथ चांदी पर भी निवेशकों की नजर है. चांदी की कीमत औद्योगिक मांग के साथ-साथ निवेश मांग से भी प्रभावित होती है. हालांकि चांदी में उतार-चढ़ाव सोने के मुकाबले ज्यादा तेज हो सकता है, इसलिए इसमें जोखिम भी अधिक रहता है.
क्या अभी पूरा सोना खरीद लेना चाहिए?
विशेषज्ञों के मौजूदा संकेतों को देखते हुए एक ही बार में पूरी रकम लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करना अधिक संतुलित रणनीति हो सकती है. खासकर आभूषण खरीदने वालों को बाजार की रोजाना कीमत देखने के बजाय अपनी वास्तविक जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी करनी चाहिए. बाजार में सोने की कीमत बढ़ने की संभावना जरूर जताई जा रही है, लेकिन कोई भी विशेषज्ञ निश्चित रूप से यह नहीं बता सकता कि भाव किस तारीख को कितना बढ़ेगा. इसलिए इसे पक्की कमाई या निश्चित कीमत बढ़ने की भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
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