मछली का शरीर काफी सख्त और कवच जैसा था. उसका रंग गहरा भूरा था और पूरे शरीर पर जाल जैसा डिजाइन बना हुआ था. उसका मुंह चपटा था और नीचे की तरफ चिपकने वाला लग रहा था. सबसे ज्यादा चर्चा उसकी आंखों को लेकर हुई, जो देखने में दो की जगह चार नजर आ रही थी. इसी वजह से थोड़ी ही देर में वह “चार आंखों वाली मछली” के नाम से पूरे इलाके में चर्चा में आ गई.
मछुआरे हैरान रह गए
कोईरौना थाना क्षेत्र के डीघ गंगा किनारे मछुआरे रोज की तरह नाव लेकर मछली पकड़ने निकले थे. शिवकुमार निषाद, भीमा निषाद, गोली निषाद, बच्चन निषाद, कमलाशंकर निषाद और शारदा निषाद को अंदाजा भी नहीं था कि आज कुछ अलग मिलने वाला है. जब इन्होंने जाल खींचा तो काफी भारी लगा, तो सभी ने मिलकर उसे बाहर निकाला. जैसे ही किनारे लाए, मछली का अजीब रूप देखकर खुद मछुआरे भी हैरान रह गए.
यह कोई रहस्यमयी मछली नहीं : मत्स्य विभाग
मामला मत्स्य विभाग पहुंचा. इसके बाद पूरी बात साफ हो गई. अधिकारियों ने बताया कि यह कोई रहस्यमयी मछली नहीं है. यह विदेशी प्रजाति की सकरमाउथ कैटफिश है, जिसे आम तौर पर ‘प्लेको’ कहा जाता है. इसकी बनावट ऐसी होती है कि सिर और आंखों के पास की बनावट की वजह से ऐसा लगता है जैसे इसमें ज्यादा आंखें हों.
इंसानों के लिए यह खतरनाक नहीं है यह मछली
विशेषज्ञों के मुताबिक यह मछली असल में दक्षिण अमेरिका की नदियों में पाई जाती है. लोग इसे एक्वेरियम में रखते हैं. इसका मुंह सक्शन (खींचकर चिपकना) जैसा होता है, जिससे यह पत्थरों से चिपककर काई खाती है. इंसानों के लिए यह खतरनाक नहीं है
लोग करने लगे तरह-तरह की चर्चा
देखते ही देखते घाट पर गांव वालों की भीड़ लग गई. कोई इसे दुर्लभ मछली बता रहा था, तो कोई इसे किसी अनहोनी का संकेत मानने लगा. इन बातों से अफवाह फैल गई और खासकर बच्चों और महिलाओं में डर का माहौल बन गया.
