UP Flood News: काशी के हरिश्चंद्र घाट पर गंगा का पानी बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है. घाट की गलियों में मलबा और गंदगी के बीच शवदाह कराया जा रहा है, जबकि सीमित जगह के कारण परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. कैमूर से अपनी मां का अंतिम संस्कार करने पहुंचे जसराम ने आरोप लगाया कि काफी देर तक शवदाह के लिए जगह नहीं मिली. इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर 10 से 12 हजार रुपये की मांग की.
जगह के लिए घंटों इंतजार, पैसे नहीं देने पर लौटाने की बात
जसराम का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी मां के शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए जगह मांगी, तो उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा. इसी बीच कुछ लोगों ने कथित तौर पर 10 से 12 हजार रुपये की मांग की. जसराम के मुताबिक, उनसे यह भी कहा गया कि अगर पैसे नहीं दे सकते तो शव वापस लेकर चले जाएं. इस आरोप के बाद घाट की व्यवस्था और अंतिम संस्कार के दौरान जरूरतमंद परिवारों की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
घाट पर जगह कम, गलियों में करना पड़ रहा अंतिम संस्कार
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण हरिश्चंद्र घाट की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई है. पानी बढ़ने से घाट का बड़ा हिस्सा डूब गया है और अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध जगह लगातार कम होती जा रही है. लकड़ियां भीगने से शवों को जलने में अधिक समय लग रहा है. ऐसे में शव लेकर आने वाले परिवारों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है. मजबूरी में कुछ परिवारों को घाट से जुड़ी गलियों और आसपास के सीमित स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है.
मां के शव को गली में दफनाने की बात, प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल
अंतिम संस्कार के लिए जगह और व्यवस्था नहीं मिलने की स्थिति में जसराम ने अपनी मां के शव को गली में दफनाने की बात कही है. गंगा के बढ़ते जलस्तर और लगातार बारिश के बीच ऐसी स्थिति ने काशी की अंतिम संस्कार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि बाढ़ जैसे हालात में शवों के अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाना जरूरी है, ताकि दूर-दराज से आने वाले परिवारों को ऐसी परेशानी न उठानी पड़े.
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