UP News: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से भटककर आया खतरनाक 'कालर नंबर वन' नाम का हाथी अब अपनी मादा साथी के साथ प्रयागराज के कोरांव स्थित अतरेंजी जंगलों में दाखिल हो चुका है. करीब दो सौ दिनों की लंबी यात्रा के दौरान इस वन्यजीव जोड़े ने एक राज्य और छह अलग-अलग जिलों की सीमाओं को पार किया है. इस अप्रत्याशित आगमन के बाद से आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों में अत्यधिक भय और दहशत का माहौल बना हुआ है.
किसान की जान लेने वाला हमलावर हाथी
इस पच्चीस वर्षीय नर हाथी का आधिकारिक पहचान क्रमांक 7548 है, जिसे कालर नंबर वन कहा जाता है. दो वर्ष पहले इस वन्यजीव ने मानपुर क्षेत्र में एक स्थानीय किसान पर हमला करके उसे मौत के घाट उतार दिया था. चौदह फरवरी को यह हाथी अपने मूल झुंड से अलग हुआ और रीवा, मऊगंज तथा मीरजापुर के रास्तों से गुजरते हुए यहां पहुंचा. हाल ही में इसने खेतों में खड़ी मक्के की फसल को पूरी तरह रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया है.
जीपीएस से लगातार रखी जा रही निगरानी
वन विभाग के अधिकारी इन वन्यजीवों की गतिविधियों पर सतर्कता पूर्वक नजर रखने के लिए जीपीएस युक्त आधुनिक ट्रैकिंग कॉलर तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. सीधी जिले से भेजी गई विशेष ट्रैकिंग मशीनों की सहायता से सुरक्षा टीमें जंगल और आसपास की सीमाओं पर मुस्तैद हैं. प्रभागीय वनाधिकारी के अनुसार हाथियों की स्मरण शक्ति बेहद तीव्र होती है, इसलिए ये अपनी इच्छा से ही प्राकृतिक मार्ग अपनाकर वापस लौटेंगे. प्रशासन द्वारा स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के सामने नई और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इन विशाल जीवों को उनके मूल निवास स्थान पर सुरक्षित वापस भेजना एक अत्यंत जटिल और जोखिम भरा कार्य है. भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अंतर्राज्यीय सीमाओं पर निगरानी तंत्र को अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है. ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं.
