UP News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पिछले करीब डेढ़ साल के भीतर 35 पुलिसकर्मियों ने स्वेच्छा से नौकरी छोड़ दी. इनमें दरोगा, आरक्षी और फायरमैन तक शामिल हैं. किसी ने बेहतर सरकारी नौकरी मिलने पर इस्तीफा दिया तो किसी ने बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वर्दी उतार दी.
डेढ़ साल में 35 पुलिसकर्मियों ने दिया इस्तीफा
पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 17 जुलाई 2026 के बीच बरेली में तैनात 35 पुलिसकर्मियों ने नियमानुसार त्यागपत्र दिया. यह संख्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस की नौकरी को लंबे समय तक सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में गिना जाता रहा है. हालांकि अब बेहतर करियर विकल्प और व्यक्तिगत परिस्थितियां इस सोच को बदलती नजर आ रही हैं.
दरोगा से लेकर आरक्षी तक ने छोड़ी नौकरी
इस्तीफा देने वालों में कई पुलिसकर्मियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर दूसरे विभागों का रुख किया. दरोगा सचिन राठी का चयन कैबिनेट सचिवालय में डीएफओ पद पर हुआ. आरक्षी शुभम अहलावत आईटीबीपी में उपनिरीक्षक बने, जबकि बीनू का चयन रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में उपनिरीक्षक पद पर हुआ. उपनिरीक्षक प्रणव रेलवे में सहायक टंकक बने. वहीं आरक्षी प्रिया ने दिल्ली पुलिस जॉइन की और हर्ष का चयन दिल्ली पुलिस में जेल वार्डर के पद पर हुआ.
बीमारी और परिवार की जिम्मेदारियों ने भी लिया बड़ा फैसला
सभी पुलिसकर्मियों ने बेहतर नौकरी के लिए इस्तीफा नहीं दिया. कई मामलों में निजी और पारिवारिक परिस्थितियां इसकी वजह बनीं. आरक्षी दिव्या यादव ने मां की खराब तबीयत के चलते नौकरी छोड़ी. आरक्षी दक्ष ने बीमारी के कारण इस्तीफा दिया. सोहित चौधरी ने पारिवारिक कारणों से सेवा समाप्त की, जबकि आरक्षी अभिषेक को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और दौरे पड़ने की वजह से नौकरी छोड़नी पड़ी.
बढ़ता दबाव और बेहतर करियर की तलाश भी बनी वजह
पुलिस सेवा में लगातार लंबी ड्यूटी, मानसिक तनाव, सीमित अवकाश और बढ़ती जिम्मेदारियों को भी नौकरी छोड़ने की प्रमुख वजह माना जा रहा है. दूसरी ओर, बेहतर वेतन, कार्य-जीवन संतुलन और करियर ग्रोथ की उम्मीद में कई पुलिसकर्मी अन्य सरकारी सेवाओं का विकल्प चुन रहे हैं.
एसएसपी ने क्या कहा?
बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि कई पुलिसकर्मी विभाग की अनुमति लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं. चयन होने के बाद वे नियमानुसार इस्तीफा देकर नई सेवा जॉइन करते हैं. यह पूरी तरह उनका व्यक्तिगत निर्णय होता है.
बदलती सोच का संकेत
बरेली का यह मामला केवल इस्तीफों का आंकड़ा नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं की भी तस्वीर पेश करता है. कभी पुलिस की वर्दी को अंतिम मंजिल मानने वाले कई युवा अब बेहतर अवसर, संतुलित जीवन और व्यक्तिगत परिस्थितियों को प्राथमिकता देते हुए नए रास्ते चुन रहे हैं. यही वजह है कि सरकारी नौकरी की चाह बरकरार होने के बावजूद पुलिस सेवा का आकर्षण पहले जैसा नहीं दिखाई दे रहा है.
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