UP News: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की रहने वाली एक बेटी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा प्रदेश गर्व कर रहा है. किसानों की परेशानी को समझकर तैयार किए गए एक अनोखे वैज्ञानिक मॉडल ने उसे देश ही नहीं, विदेश तक पहचान दिलाई. अब इसी उपलब्धि के लिए भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने भी उसे सम्मानित किया है. आइए जानते हैं कौन हैं पूजा पाल और कैसे एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने सफलता की नई मिसाल कायम की.
मुंबई में सचिन तेंदुलकर ने किया सम्मानित
बाराबंकी की बाल वैज्ञानिक पूजा पाल को मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित बैंक ऑफ बड़ौदा के 119वें स्थापना दिवस समारोह में सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने उन्हें उत्कृष्ट वैज्ञानिक उपलब्धि और धूल रहित थ्रेसर मॉडल विकसित करने के लिए सम्मानित किया. इस दौरान सचिन तेंदुलकर ने पूजा की संघर्ष से सफलता तक की कहानी भी सुनी और उनकी उपलब्धि की सराहना की. सम्मान मिलने के बाद पूजा के परिवार, शिक्षकों और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है.
सचिन तेंदुलकर ने क्या कहा?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिन तेंदुलकर ने कहा कि चुनौतियां ही इंसान की प्रतिभा को निखारती हैं. उन्होंने कहा कि जीवन में मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन उनसे डरने की बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए. सचिन ने पूजा के शिक्षक राजीव श्रीवास्तव की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि जैसे उनके जीवन में गुरु रमाकांत आचरेकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा, उसी तरह पूजा की सफलता के पीछे भी उनके शिक्षक की बड़ी भूमिका है.
कौन हैं पूजा पाल?
पूजा पाल उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सिरौसी गौसपुर ब्लॉक के डलई का पुरवा गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता पुत्तीलाल दिहाड़ी मजदूर हैं और साधारण आर्थिक स्थिति के बावजूद परिवार ने पूजा की पढ़ाई और सपनों को कभी रुकने नहीं दिया. सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी पूजा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर विज्ञान के क्षेत्र में ऐसी पहचान बनाई, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया.
किस इनोवेशन ने दिलाई पहचान?
करीब तीन साल पहले पूजा पाल ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए धूल रहित थ्रेसर (Dust-Free Thresher) का एक मॉडल तैयार किया. इस मॉडल का उद्देश्य खेती के दौरान उड़ने वाली धूल से किसानों को होने वाली परेशानी को कम करना था. उनके इस अभिनव मॉडल को वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने काफी सराहा. यही इनोवेशन आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बना और उन्हें कई बड़े सम्मान दिलाने का आधार भी बना.
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं सम्मानित
पूजा पाल की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा उनके इसी इनोवेशन की बदौलत उन्हें जापान में आयोजित कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिला. जनवरी 2024 में वह राष्ट्रीय विज्ञान मेले में देशभर से चुने गए 100 प्रतिभाशाली बच्चों में शामिल थीं. इसके बाद 14 जून 2025 को भारत सरकार ने उन्हें जापान भ्रमण पर भेजा.
ऐसे शुरू हुआ सफलता का सफर
पूजा की वैज्ञानिक यात्रा वर्ष 2020 में शुरू हुई, जब उन्होंने पहली बार धूल रहित थ्रेसर का मॉडल तैयार किया. सबसे पहले यह मॉडल जिला स्तर पर चयनित हुआ. इसके बाद मंडल और लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में भी इसे जगह मिली. यहीं से उनकी सफलता का सिलसिला आगे बढ़ता गया. बाद में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में भी उनके मॉडल को खूब सराहा गया. लगातार मिल रही सफलता ने पूजा पाल को देश की उभरती हुई युवा वैज्ञानिकों की सूची में शामिल कर दिया और आज उनकी कहानी हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.
