बलिया बलिदान दिवस पर फिर गूंजा आजादी का जयघोष: खुला जेल का फाटक, शहीदों को नमन, दयाशंकर सिंह और अजय राय हुए शामिल

UP News: 19 अगस्त बलिया के 'बागी' इतिहास का प्रतीक है, जब क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को सीधी चुनौती दी थी. इस बलिदान दिवस पर जेल का फाटक खोल शहीदों को नमन किया गया. प्रदेश के मंत्री दयाशंकर सिंह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी दी श्रद्धांजलि.

UP News: 19 अगस्त का दिन बलिया के इतिहास में सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उस विद्रोह की याद है, जिसने इस धरती को ‘बागी बलिया’ की पहचान दी. बलिया बलिदान दिवस पर बुधवार को जिले में शहीद क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी गयी. कार्यक्रम के दौरान ऐतिहासिक जेल फाटक खोला गया और स्वतंत्रता आंदोलन के उन सेनानियों को याद किया गया, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की थी. कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह समेत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी पहुंचे. नेताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में बलिया के योगदान और यहां के वीर सेनानियों के बलिदान को याद किया. इस दौरान देशभक्ति के नारों और श्रद्धांजलि कार्यक्रम से माहौल भावुक हो गया.


हाथ में तिरंगा लिए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और अन्य

1942 में बलिया ने अंग्रेजों को दी थी खुली चुनौती

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 अगस्त 1942 को बलिया में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ दिया था. चित्तू पांडेय के नेतृत्व में आंदोलन ने ऐसा रूप लिया कि ब्रिटिश प्रशासन को बलिया में अपनी पकड़ खोनी पड़ी. क्रांतिकारियों ने सरकारी संस्थानों पर कब्जा कर समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी थी.

जेल का फाटक खुला, बाहर निकले आंदोलनकारी

उस दौर में बलिया जिला जेल के बाहर हजारों की भीड़ जुट गयी थी. आंदोलनकारियों की मांग थी कि जेल में बंद नेताओं और सत्याग्रहियों को तत्काल रिहा किया जाये. दबाव बढ़ने के बाद चित्तू पांडेय सहित कई आंदोलनकारियों को जेल से रिहा किया गया. जेल फाटक खुलने की यह घटना बलिया के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल है.


जिला कारागार स्थित शहीद राजकुमार बाघ की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते एआईएमआईएम व कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता

बलिदान ने दिलायी ‘बागी बलिया’ की पहचान

बलिया की क्रांति अचानक पैदा हुई घटना नहीं थी. 1857 के विद्रोह में मंगल पांडेय की बगावत से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक इस क्षेत्र में अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध की मजबूत परंपरा रही. 1942 के आंदोलन में अनेक क्रांतिकारियों ने गोली खायी और जेल की यातनाएं सहीं. इसी संघर्ष ने बलिया को ‘बागी बलिया’ के रूप में देशभर में पहचान दिलायी.

शहीदों के बलिदान को याद रखने का संकल्प

बलिया बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि आजादी केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे हजारों लोगों का संघर्ष और बलिदान था. नयी पीढ़ी को इस इतिहास से जोड़ना और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद रखना समाज की जिम्मेदारी है. बलिया की धरती पर हर साल 19 अगस्त को मनाया जाने वाला बलिदान दिवस इसी गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है. 1942 की वह क्रांति आज भी यहां के लोगों के लिए स्वाभिमान, साहस और देशभक्ति का प्रतीक बनी हुई है.

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By तिलक कुमार

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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