Ayodhya Ram Mandir: जिस रामलला को कभी टेंट में विराजकर भक्तों के दर्शन देने पड़े थे, उनकी वह संघर्षगाथा अब आने वाली पीढ़ियां भी देख सकेंगी. अयोध्या में उस दौर की यादों को सहेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है. टेंट से अस्थायी मंदिर और वहां से भव्य राम मंदिर तक की यात्रा को तस्वीरों, अभिलेखों और डिजिटल माध्यम से सामने लाया जाएगा.
अस्थायी मंदिर बनेगा स्मृति स्थल
अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में बने अस्थायी मंदिर को धार्मिक स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया गया है. यहां एक विशेष दीर्घा तैयार करने की योजना है. इसमें रामलला के टेंट में रहने से लेकर अस्थायी मंदिर में पूजा और दर्शन तक की जानकारी दिखाई जाएगी. 1990 से अब तक के महत्वपूर्ण चित्र भी दीर्घा का हिस्सा होंगे.
डॉक्यूमेंट्री में दिखेगा संघर्षकाल
श्रद्धालुओं को इस दौर की कहानी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के जरिए भी दिखाई जाएगी. इसमें पुजारियों, सेवकों और सुरक्षाबलों की भूमिका को भी जगह दी जाएगी. उद्देश्य यह है कि युवा पीढ़ी रामलला के संघर्षकाल और उससे जुड़ी स्मृतियों को करीब से समझ सके.
सागौन की लकड़ी से बना है मंदिर
ट्रस्ट के अनुसार अस्थायी मंदिर का निर्माण टीकवुड यानी सागौन की लकड़ी से कराया गया है. इसकी बनावट भी राम मंदिर की शैली से मिलती-जुलती है. परिसर में अखंड ज्योति भी स्थापित की गई है, जो लगातार प्रज्ज्वलित रहती है. अभी श्रद्धालुओं के लिए यहां प्रवेश शुरू नहीं हुआ है. काम पूरा होने के बाद दर्शन की अनुमति दिए जाने की तैयारी है.
तीन साल नौ माह 29 दिन का रहा प्रवास
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 25 मार्च 2020 को रामलला को टेंट से अस्थायी मंदिर में विराजमान कराया गया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विग्रह को अपनी गोद में लेकर गर्भगृह में स्थापित किया था. इसके बाद रामलला करीब तीन साल नौ माह 29 दिन तक इसी अस्थायी मंदिर में विराजमान रहे. अब इसी दौर की स्मृतियां एक जगह सहेजकर श्रद्धालुओं के सामने रखने की तैयारी है.
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