UP Teacher Transfer: यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर स्थिति साफ करते हुए अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि किसी शिक्षक को ट्रांसफर का स्वतः अधिकार नहीं है और न ही किसी कानून के तहत इसे निहित अधिकार माना जा सकता है. शिक्षक का ट्रांसफर संबंधित नीति और सेवा नियमों के आधार पर ही होगा. न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने कहा कि किसी कानून के आधार पर शिक्षक अपने आप ट्रांसफर का अधिकार नहीं मांग सकते.
RTE एक्ट में ट्रांसफर का अधिकार नहीं
हाईकोर्ट ने बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के अंतर-जिला ट्रांसफर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से तैयार जिला-वार स्टूडेंट-टीचर रेश्यो (PTR) सूची का RTE एक्ट, 2009 के प्रावधानों से कोई सीधा संबंध नहीं है. अदालत ने कहा कि आरटीई अधिनियम में शिक्षकों के अधिकारों की बजाय उनके कर्तव्यों पर अधिक जोर दिया गया है. इसलिए इस कानून के आधार पर शिक्षक ट्रांसफर का अधिकार नहीं मांग सकते.
सेवा नियमों में ट्रांसफर की व्यवस्था
फैसले में उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन (टीचर्स) पोस्टिंग रूल्स, 2008 के नियम 8(2)(d) का भी उल्लेख किया गया. इसके तहत आम तौर पर पोस्टिंग के पांच साल के भीतर अंतर-जिला ट्रांसफर के आवेदन पर विचार नहीं किया जाता. हालांकि, विशेष परिस्थितियों में महिला शिक्षकों को पति या ससुराल वाले जिले में ट्रांसफर की राहत मिल सकती है. वहीं, यूपी बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली, 1981 के नियम 21 के तहत बोर्ड की मंजूरी के बिना ट्रांसफर पर रोक का प्रावधान है.
शिक्षकों के लिए क्या साफ हुआ?
हाईकोर्ट के इस फैसले से शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है. अदालत ने माना कि ट्रांसफर कोई ऐसा अधिकार नहीं है, जिसे शिक्षक किसी कानून के आधार पर स्वतः हासिल कर सकें. इसके लिए संबंधित ट्रांसफर पॉलिसी और सेवा नियमों का पालन जरूरी है. न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने यह भी टिप्पणी की कि पूरे RTE एक्ट में शिक्षकों के पक्ष में कोई ऐसा अधिकार नहीं दिया गया है, जबकि उनके कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है.
यह भी पढ़ें: दूसरे से बात करती थी बसपा नेता की पत्नी कंचन, भतीजे ने उतार दिया मौत के घाट: नगरा हत्याकांड के खुलासे ने सबको चौंकाया
