UP NEWS: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सीरप की अवैध तस्करी और बिक्री से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए भोला जायसवाल और विभोर राणा समेत 17 प्रमुख आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं. हालांकि, इस बड़े आपराधिक नेटवर्क के मामले में अदालत ने कुछ अन्य आरोपियों की राहत अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत की मंजूरी दे दी है.
कोर्ट में सरकारी वकील और बचाव पक्ष की तीखी बहस
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद पूर्व में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने याचिकाओं का कड़ा विरोध किया था. उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि फर्जी बिलों के सहारे स्वीकृत सीमा से अधिक मात्रा में सीरप की खरीद-बिक्री की गई. आरोपी पक्ष इतनी बड़ी खेप के स्रोत और बिक्री का कोई वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर पाया.
तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश और अंतिम अदालती आदेश
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल वैध लाइसेंस धारक हैं और उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है. हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि प्रदेश भर में कई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और व्यापक स्तर पर नशे के उद्देश्य से इस सीरप की तस्करी की जा रही थी. 1 सितंबर 2026 को सुनाए गए इस निर्णय के बाद जेल में बंद मुख्य माफियाओं की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.
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