UP News: एक मोबाइल फोन, दो कॉल और एक नाबालिग की हिम्मत... अलीगढ़ में मानव तस्करी के कथित ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसकी कड़ियां छत्तीसगढ़ से लेकर अलीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर तक जुड़ी होने की आशंका है. पुलिस के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा बच्चियों को बेहतर भविष्य और शादी का सपना दिखाकर यहां लाया जाता था. फिर उनकी कथित कीमत 70 हजार से एक लाख रुपये तक लगाई जाती थी. मामले में महिला सरगना बबिता उर्फ ‘चाची’ समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है.
पहली कॉल ने नहीं खोला राज, दूसरी बार बच्ची ने पुलिस को सब बता दिया
कहानी टप्पल के मौर गांव से शुरू होती है. पुलिस के अनुसार, छत्तीसगढ़ की एक नाबालिग बच्ची को यहां लाया गया था. आरोप है कि उसकी जबरन शादी करा दी गई और इसके बाद उसे घर में बंधक बनाकर रखा गया.बच्ची के साथ मारपीट और प्रताड़ना की जाती थी. बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था. इसी बीच उसकी नजर घर की बहू के मोबाइल पर पड़ी. उसने मौका देखकर मोबाइल उठाया और उसका पैटर्न लॉक खोल लिया. फिर उसने डायल 112 पर कॉल कर दी.
पुलिस पहुंची, लेकिन परिवार ने कर दिया गुमराह
बच्ची ने फोन पर पुलिस को अपनी परेशानी बताई. 7 अगस्त को सूचना मिलते ही सीओ खैर अभिषेक पटेल और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम मौके पर पहुंची.पुलिस के मुताबिक, परिवार ने बच्ची को घर के अंदर कर दिया. टीम को बताया गया कि फोन गलती से लग गया था. पुलिस वापस लौट गई. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.
घर से निकलते ही फिर मांगा मोबाइल
बच्ची ने हिम्मत नहीं छोड़ी. उसे जैसे ही मौका मिला, वह घर से बाहर निकल गई. रास्ते में उसे एक राहगीर मिला. उसने उससे मोबाइल मांगा. इसके बाद उसने फिर 112 पर कॉल की. इस बार बच्ची ने पुलिस को वह सब बताया, जो पहली बार नहीं बता पाई थी. रेलवे स्टेशन से लेकर अलीगढ़ पहुंचने तक की पूरी कहानी पुलिस के सामने रख दी.
एक नाम से खुलने लगीं दूसरी कड़ियां
बच्ची ने पुलिस को बबिता उर्फ ‘चाची’ और सुखाराम उर्फ महावीर के बारे में जानकारी दी. पुलिस ने इन सुरागों पर जांच शुरू की. जांच आगे बढ़ी तो दो और नाबालिग बच्चियों के इस कथित नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी मिली. पुलिस ने दोनों को भी सुरक्षित मुक्त करा लिया.एक बच्ची की दूसरी कॉल अब पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी बन चुकी थी.
छत्तीसगढ़ से अलीगढ़ पहुंची थी 15 साल की बच्ची
पुलिस के मुताबिक, करीब चार महीने पहले 15 वर्षीय बच्ची छत्तीसगढ़ से एक युवक के साथ निकली थी. कुछ दिनों बाद वही युवक उसे अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर अकेला छोड़कर चला गया. बच्ची के परिजनों ने छत्तीसगढ़ में युवक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था. स्टेशन पर अकेली बच्ची को कथित तौर पर बबिता उर्फ ‘चाची’ ने देखा. आरोप है कि उसने बच्ची को खाना खिलाया और मदद का भरोसा दिया. इसके बाद सुखाराम उर्फ महावीर के जरिए बच्ची को टप्पल के मौर गांव निवासी विनोद जाट के पास पहुंचाया गया.
‘शादी के लिए लड़की चाहिए’... इसी मांग से जुड़ा कथित नेटवर्क
पुलिस की जांच में आरोप है कि बबिता ऐसे लोगों के संपर्क में थी, जिन्हें शादी के लिए लड़की की तलाश रहती थी. धीरे-धीरे यही मांग उसके लिए कथित कमाई का जरिया बन गई. आरोप है कि वह दूसरे राज्यों से बच्चियों को अलीगढ़ लाती थी. इसके बाद सुखाराम अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में उनके लिए कथित खरीदार तलाशता था. बच्चियों को शादी के नाम पर ऐसे परिवारों तक पहुंचाने का आरोप है, जहां लड़कों की शादी नहीं हो पा रही थी.
70 हजार से एक लाख रुपये तक की कथित कीमत
पुलिस के मुताबिक, बच्चियों का कथित सौदा 70 हजार से एक लाख रुपये तक में होता था. पुलिस को यह आशंका भी है कि इस नेटवर्क के जरिए कुछ बच्चियों को दिल्ली-एनसीआर में घरेलू काम के लिए भेजा जाता था. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि यह नेटवर्क कितने समय से चल रहा था और इसमें कितनी बच्चियां फंसी थीं.
कौन है ‘चाची’, जिसने कथित तौर पर बनाया नेटवर्क?
पुलिस के अनुसार, बबिता उर्फ ‘चाची’ मूल रूप से प्रयागराज के सराय इनायत क्षेत्र की रहने वाली है. उसका जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था. करीब 25 साल पहले उसकी शादी प्रयागराज निवासी रामबली यादव से हुई थी. शादी के बाद दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में उसके संपर्क बढ़े. पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान उसे ऐसे परिवारों की जानकारी होने लगी, जिन्हें शादी के लिए लड़की की तलाश थी. इसके बाद आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा बच्चियों को कथित तौर पर निशाना बनाया जाने लगा.
बबिता लाती थी, सुखाराम तलाशता था कथित खरीदार
पुलिस के मुताबिक, राजस्थान के डीग का रहने वाला सुखाराम उर्फ सूखा उर्फ महावीर फौजदार अलीगढ़ के गोंडा क्षेत्र में रह रहा था. पुलिस का आरोप है कि बबिता दूसरे राज्यों से बच्चियों को लाती थी और सुखाराम उनके लिए अलीगढ़ व आसपास के इलाकों में कथित खरीदार तलाशता था. जांच में यह भी सामने आया है कि सुखाराम पहचान छिपाकर अलीगढ़ में रह रहा था.
तीन बच्चियां मुक्त, पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने बबिता उर्फ ‘चाची’ और सुखाराम उर्फ महावीर को गिरफ्तार किया है. इनके अलावा मौर गांव निवासी विनोद जाट, गोंडा निवासी बबलू और ओमपाल सिंह को भी पकड़ा गया है. पुलिस के अनुसार, इन तीनों पर शादी के नाम पर नाबालिग बच्चियों को खरीदने का आरोप है. जांच के दौरान तीन नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया.
अब पुलिस तलाश रही है नेटवर्क के बाकी चेहरे
मामला पांच गिरफ्तार आरोपियों पर खत्म नहीं हुआ है. पुलिस अब नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि बबिता और सुखाराम का कथित नेटवर्क कितने राज्यों तक फैला था. अब तक कितनी बच्चियों को अलीगढ़ लाया गया और कितनों की कथित खरीद-फरोख्त हुई, इसकी भी जांच हो रही है. पुलिस दिल्ली-एनसीआर तक नेटवर्क की संभावित कड़ियों को भी खंगाल रही है.
गंभीर धाराओं में केस, पांचों आरोपी जेल भेजे गए
एसपी ग्रामीण मनीष कुमार मिश्रा के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी, नाबालिग से दुष्कर्म, पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है. पुलिस अब मुक्त कराई गई बच्चियों के मूल परिजनों का पता लगाने के साथ नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश कर रही है.
एक बच्ची की हिम्मत ने खोल दिया पूरा खेल
जिस बच्ची को कथित तौर पर चुप कराकर घर में रखा गया था, उसी ने पूरे नेटवर्क की सबसे कमजोर कड़ी पकड़ ली. पहली बार उसने घर के मोबाइल से 112 पर कॉल की. मदद नहीं मिली तो दूसरी बार घर से निकलकर किसी राहगीर से मोबाइल मांगा और फिर पुलिस को फोन किया. दूसरी कॉल के बाद जांच की दिशा बदल गई. तीन नाबालिग बच्चियां मुक्त हुईं और पांच आरोपी गिरफ्तार हुए. अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—‘चाची’ के इस कथित नेटवर्क में और कितने चेहरे हैं और अब तक कितनी बच्चियां इसकी शिकार बनी हैं?
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