Meerut Rescue Operation: मेरठ में 8 महीने के बच्चे के लापता होने की सूचना ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी. 11 अगस्त को टीपीनगर क्षेत्र निवासी व्यक्ति ने बताया कि उसकी पत्नी बच्चे को लेकर घर से निकली थी, लेकिन बाद में अकेली लौटी. बच्चा उसके साथ नहीं था. सूचना मिलते ही पुलिस ने तलाश के लिए टीम गठित की. बच्चे की मां स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण पुलिस को स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रही थी, जिससे जांच और मुश्किल हो गई.
150 से ज्यादा CCTV खंगाले
पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. पांच दिनों तक टीम ने 150 से अधिक कैमरों की रिकॉर्डिंग को बारीकी से देखा और महिला व बच्चे के संभावित रास्तों की पहचान की. फुटेज में मिली छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर पुलिस ने संभावित स्थानों की सूची तैयार की. इसके साथ ही स्थानीय लोगों, दुकानदारों और रास्ते में मौजूद अन्य लोगों से भी लगातार पूछताछ की गई.
200 ई-रिक्शा चालकों से पूछताछ
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम ने करीब 200 ई-रिक्शा और ऑटो चालकों से भी संपर्क किया. उन्हें बच्चे और उसकी मां की तस्वीरें व फुटेज दिखाकर जानकारी जुटाई गई. अलग-अलग स्थानों से मिले सुरागों और सीसीटीवी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को परतापुर क्षेत्र के ग्राम भूड़बराल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिली. इसके बाद टीम ने वहां तलाश तेज की और 15 अगस्त को लापता बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया.
परिजनों को सौंपा गया बच्चा
पुलिस के अनुसार, बच्चे की मां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रही थी और वह बच्चे को भूड़बराल में छोड़कर वहां से चली गई थी. स्थानीय लोगों ने महिला को उसके घर पहुंचा दिया था. बच्चे के मिलने के बाद पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराया और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं. इसके बाद 8 महीने के बच्चे को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. पांच दिनों की लगातार मेहनत से परिवार को आखिरकार राहत मिली.
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