पीएम ने डांटा तो सांसद के पर्सनल स्टाफ से पिता हुए बाहर

।।राजेन्द्र कुमार।। लखनऊः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार के सभी मंत्रियों के कामकाज पर नजर रखने के साथ ही पार्टी के हर सांसदों की गतिविधियों पर भी नजर जमाएं हुए है. बाराबंकी संसदीय सीट से चुनाव जीती भाजपा की सांसद प्रियंका सिंह रावत को रविवार को इसका अहसास हो गया क्योंकि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी […]

।।राजेन्द्र कुमार।।

लखनऊः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार के सभी मंत्रियों के कामकाज पर नजर रखने के साथ ही पार्टी के हर सांसदों की गतिविधियों पर भी नजर जमाएं हुए है. बाराबंकी संसदीय सीट से चुनाव जीती भाजपा की सांसद प्रियंका सिंह रावत को रविवार को इसका अहसास हो गया क्योंकि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन करके प्रियंका रावत को अनुशासनहीनता करने के लिए फटकार लगायी. प्रियंका रावत को अपने पर्सनल स्टाफ में उत्तम राम को तैनात करने के लिए प्रधानमंत्री ने फटकारा. उत्तम राय सांसद प्रियंका रावत के पिता है. जिन्हें प्रियंका रावत ने प्रधानमंत्री ने निर्देशों की अनदेखी कर अपने पर्सनल स्टाफ में तैनात किया था. प्रधानमंत्री को प्रियंका रावत का वह बरताव ठीक नहीं लगा और उन्होंने अपनी सांसद को डांटा. पीएम की फटकार के बाद प्रियंका रावत ने अपने पिता को पर्सनल स्टाफ से हटा दिया.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 26 मई को अपनी सरकार के सभी मंत्रियों को यह निर्देश दिया था कि वह अपने पर्सनल स्टाफ में किसी नाते-रिश्तेदार को शामिल ना करे. प्रधानमंत्री ने इस निर्देश को बारांबकी से पहली बार चुनाव जीत का संसद पहुंची भाजपा की ही सांसद प्रियंका सिंह रावत ने नहीं माना और उन्होंने उसी दिन अपने पिता उत्तम ‍राम को अपने पर्सनल स्टाफ में तैनात कर दिया. जिसकी जानकारी उन्होंने बाराबंकी के जिलाधिकारी को एक पत्र के जरिए दी, जिसमें उन्होंने लिखा कि मैंने उत्तम रायम को सभी शासकीय विभागों और क्षेत्र के तमाम विकास कार्यो के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्ति किया गया है. रावत ने अपने पिता उत्तम राम को प्रतिनिधि नियुक्त करने के पीछे तर्क दिया कि वह अपने क्षेत्र के बीजेपी कार्यकर्ताओं से जुड़ी रहना चाहती हैं, इसलिए उन्होंने यह फैसला किया है. प्रियंका रावत के पिता उत्तम राम सेवानिवृत्त अधिकारी हैं.

पार्टी की सांसद प्रियंका रावत के इस फैसले की जानकारी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई को हुई तो उन्होंने इस मामले में प्रियंका रावत से पूछताछ कर उन्हें अपना फैसला बदलने को कहा, पर वह नहीं मानी. सूत्रों के अनुसार 30 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संज्ञान में पार्टी सांसद द्वारा उनके निर्देशों की अनदेखी करने का यह मामला आया तो पहले तो उन्होंने लक्ष्मीकांत वाजपेई से इस मामले में बात की और फिर रविवार को फोन कर प्रियंका रावत को अनुशासन में रहने की घुटी पिलाई. जिसका त्वरित असर हुआ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर हुई बात के तत्काल बाद प्रियंका रावत ने अपने पिता उत्तम राम को अपने पर्सनल स्टाफ से हटाने जाने का संदेश जिले के अधिकारियों को जारी कर दिया.

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