Rourkela News: बिसरा थाना क्षेत्र में करीब ढाई महीने पहले एक आदिवासी युवती की मौत के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर जामबेरना गांव के सैकड़ों ग्रामीण शनिवार को राउरकेला एसपी कार्यालय पहुंचे. इनकी अगुआई वरिष्ठ वामपंथी नेता छवि मोहंती कर रही थीं. ग्रामीणों का कहना है कि वारदात को 72 दिन बीत जाने के बावजूद किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. तख्तियों पर पीड़िता को न्याय दिलाने से संबंधित नारे लिखकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया. छवि मोहंती ने कहा कि जिस तरह की जघन्य घटना घटी, हम सभी जानना चाहते हैं कि पीड़िता के साथ दरअसल हुआ क्या था.
जांच तो शुरू हुई, लेकिन अब तक नहीं हुई कार्रवाई : छवि मोहंती
एसपी कार्यालय के सामने छवि मोहंती ने कहा कि पांच फरवरी को हुई इस वारदात के बाद पीड़िता को लेकर उसके माता-पिता अस्पताल दर अस्पताल घूमते रहे, लेकिन कहीं उसे इलाज तक नहीं मिला था. तथाकथित सभ्य समाज में एक नाबालिग को बगैर इलाज के दम तोड़ना पड़ा. इस वारदात ने पूरे शहर को झंकझोर दिया था. जिसके बाद जांच शुरू हुई, लेकिन अभी तक हमें कुछ ऐसा नजर नहीं आ रहा है, इसलिए हम एसपी ऑफिस पहुंचे. यहां एसपी की गैरमौजूदगी में हमें एएसपी ने बताया है कि जांच सही दिशा में चल रही है और संदिग्धों का लाइ डिटेक्शन टेस्ट कराने का प्रयास जारी है. जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी. हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि पीड़िता को इंसाफ मिले.
मेरी बेटी को इंसाफ मिले : पीड़िता के पिता
पीड़िता के पिता भी शनिवार को एसपी कार्यालय पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी के साथ जो कुछ हुआ, वह किसी और की बेटी के साथ नहीं हो, यही मैं चाहता हूं. इसलिए मैं यहां पर पहुंचा हूं. मुझे इंसाफ चाहिए ताकि दोबारा समाज में किसी के साथ ऐसा नहीं हो.
छह फरवरी को बेसुध मिली थी नाबालिग
जामबेरना गांव की एक नाबालिग घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी, लेकिन शाम होने तक वह वापस नहीं लौटी. परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. बाद में उन्होंने बिसरा थाना में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करायी थी. वहीं छह फरवरी को नाबालिग के बेसुध हालत में पड़े होने की सूचना पर परिजन और ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और किशोरी को बिसरा सरकारी अस्पताल ले गये. वहां प्राथमिक जांच के बाद नाबालिग को राउरकेला सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया. जहां से डॉक्टरों ने उसे हाइटेक अस्पताल रेफर किया गया. हाइटेक अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को बताया गया कि आइसीयू में बेड खाली नहीं है. इसके बाद परिजन किशोरी को लेकर अपोलो अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां भी आइसीयू बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया. लगातार निराशा हाथ लगने पर परिजन किशोरी को लेकर आइजीएच पहुंचे, लेकिन वहां भी यही जवाब मिला. रातभर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने के बाद मजबूरन परिजन किशोरी को दोबारा राउरकेला सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.
सही दिशा में चल रही जांच : एसपी
राउरकेला एसपी नीतेश वाधवानी ने कहा कि घटना को गंभीरता से लेकर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. हमने सभी संभावनाओं को खंगाला है और अगर परिवार किसी नयी संभावना की ओर इशारा कर रहा है, तो हम उसे भी खंगाल रहे हैं. जांच सही दिशा में चल रही है और जो भी कार्रवाई है, वह होगी. जहां तक गिरफ्तारी की बात है, तो बगैर साक्ष्य के यह संभव नहीं है. अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिसमें हत्या जैसी बात सामने आये.
