Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल के वृद्धावस्था वार्ड में इलाज के लिए डॉक्टर नहीं

Rourkela News: राउरकेला सरकराी अस्पताल में वृद्धावस्था वार्ड खोला गया है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा.

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) में वरिष्ठ नागरिकों को इलाज मिलना अब मुश्किल होता जा रहा है. अस्पताल में वृद्धावस्था वार्ड तो बना है, लेकिन डॉक्टरों की भारी कमी के चलते 60 साल से अधिक आयु के मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है. जानकारी के अनुसार, हर दिन 50 से अधिक वरिष्ठ नागरिक इलाज के लिए आरजीएच पहुंचते हैं, लेकिन उनके लिए कोई विशेष सुविधा नहीं है. अगर कोई बुजुर्ग चाहे, तो दूसरे वार्ड में खाली बिस्तर मिलने पर ही भर्ती हो सकता है.

आरजीएच में स्वीकृत 138 पद पर केवल 78 डॉक्टर तैनात

अस्पताल में मरीजों की संख्या के अनुपात में 138 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 78 डॉक्टर तैनात हैं. वहीं डॉक्टरों के 60 पद खाली हैं. 78 में से 17 डॉक्टर कार्यभार संभालने के बाद स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए छुट्टी पर चले गये हैं. तीन नये डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है, लेकिन उन्होंने अभी काम शुरू नहीं किया. अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक. वर्तमान सिर्फ 58 डॉक्टर ही मरीजों की देखभाल कर रहे हैं. इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी गयी है.

यूपीएचसी के शिविरों में 30989 वरिष्ठ नागरिकों ने कराया पंजीकरण, 29133 का हुआ इलाज

शहर के 10 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) में हर महीने के चौथे शनिवार को वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धावस्था शिविर लगता है. अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 30,989 वरिष्ठ नागरिकों ने इन शिविरों में पंजीकरण कराया, जिनमें से 29,133 का इलाज किया गया. इनमें मधुमेह, मनोभ्रंश, ऑस्टियोपोरोसिस, टीकाकरण, मानसिक स्वास्थ्य और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं दी गयीं, लेकिन बुजुर्ग मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए महीने में एक दिन का यह शिविर नाकाफी साबित हो रहा है. इसी वजह से ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक निजी क्लीनिक पर निर्भर होते जा रहे हैं. आरजीएच में विशेषज्ञों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बुजुर्ग मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक डॉक्टरों के खाली पद नहीं भरे जाते और वृद्धावस्था वार्ड में स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं होती, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे.

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