Sambalpur News: कुचिंडा अनुमंडल की कुलेईगढ़ पंचायत के कुड़ापाड़ा गांव में प्रकृति बंधु सरोज मेहर का अनोखा प्रयास क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. सरोज मेहर ने अपने घर के पास स्थित एक छोटे पहाड़ पर लगभग 250 आम के पौधे लगाये हैं. प्रारंभ में सभी पौधे हरे-भरे और सुंदर दिखायी दे रहे थे, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ पानी की कमी के कारण पौधे सूखने लगे. यह देखकर वे चिंतित हो गये और पौधों को बचाने के लिए उपाय ढूंढने लगे.
पौधे सूखने लगे, तो जुगाड़ का लिया सहारा
सरोज ने सबसे पहले पौधों के आसपास की जमीन को साफ किया तथा पूरे क्षेत्र को तारबंदी कर पशुओं (गाय, बैल और बकरियों) से सुरक्षा प्रदान की. इसके बावजूद तेज गर्मी और पानी की कमी से पौधों के सूखने की समस्या बनी रही. इसी समस्या का समाधान निकालते हुए सरोज मेहर ने प्लास्टिक की एक व दो लीटर की बोतलों का उपयोग करने का फैसला लिया. उन्होंने प्लास्टिक बोतलों के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद किये और पौधों की जड़ों के पास 5–6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर उन्हें स्थापित कर दिया. इसके बाद बोतलों में पानी भर दिया, जिससे पानी धीरे-धीरे मिट्टी में रिसकर जड़ों तक पहुंचता रहता है और पौधों को लगातार नमी मिलती रहती है. सरोज मेहर प्रतिदिन लगभग 50 लीटर पानी पौधों को उपलब्ध कराते हैं.
सरोज के प्रयास में परिजनों का भी मिल रहा साथ
सरोज केवल पेड़-पौधों ही नहीं, बल्कि प्रकृति में रहने वाले सभी जीव-जंतुओं से भी गहरा प्रेम करते हैं. इस कार्य के लिए उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है. वे अपने स्वयं के परिश्रम और संसाधनों से प्रकृति संरक्षण का यह कार्य निरंतर कर रहे हैं. इस सराहनीय प्रयास में उनके परिजन नमिता मेहर, सौदामिनी मेहर, मंदाकिनी मेहर तथा डंबरुधर मेहर भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं. क्षेत्र के लोगों ने सरोज मेहर के इस अनोखे प्रयास की प्रशंसा करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बताया है.
