Rourkela News: एनआइटी के विकसित किया नया उपकरण, मसालों व खाद्य सामग्रियों में मिलावट का मात्र कुछ सेकंड में लगेगा पता

Rourkela News: एनआइटी राउरकेला के शोधार्थियों ने एफटीआइआर पर आधारित नया उपकरण विकसित किया है, जिसे पेटेंट मिला है.

Rourkela News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे सिस्टम के लिए पेटेंट हासिल किया है, जो मसालों और खाने के अन्य सामानों में मिलावट का तेजी से पता लगा सकता है और उसे माप सकता है. खाने की सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौती को हल करने के लिए, इस नयी तकनीक में सटीक नतीजे देने के लिए फूरियर ट्रांसफॉर्म इंफ्रारेड (एफटीआइआर) स्पेक्ट्रोस्कोपी को एडवांस्ड मशीन लर्निंग मॉडल्स के साथ जोड़ा गया है.

लागत कम करने के लिए मसालों में मिलावट से खाने की गुणवत्ता होती है खराब

भारत के संदर्भ में, खाने और मसालों में मिलावट से सेहत और अर्थव्यवस्था, दोनों को गंभीर खतरा पहुंचता है. ऐसा अक्सर लागत कम करने के तरीकों और खाने की सुरक्षा के मानकों की ठीक से जांच न होने के कारण होता है. खाने में मिलावट का पता लगाने के पारंपरिक तरीके, जैसे क्रोमैटोग्राफी या मॉलिक्यूलर तकनीकें, बहुत ज्यादा संसाधनों का इस्तेमाल करती हैं और नतीजे देने में काफी समय लेती हैं. इसलिए वे रोजाना की तेज जांच के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं हैं. इन कमियों को दूर करने एनआइटी राउरकेला के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह सिस्टम एक तेज, बिना नुकसान पहुंचाए जांच करने वाला और किफायती विकल्प देता है, जो क्वालिटी कंट्रोल लैब्स और इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग यूनिट्स में तुरंत इस्तेमाल के लिए उपयुक्त है. एफटीआइआर स्पेक्ट्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक है, जिसका इस्तेमाल ऑर्गेनिक और कुछ इनऑर्गेनिक पदार्थों की पहचान करने के लिए किया जाता है. यह मापती है कि वे इंफ्रारेड रोशनी को किस तरह सोखते हैं. खाने की जांच के दौरान, यह नया सिस्टम इन पैटर्न्स को इकट्ठा करता है और मशीन लर्निंग मॉडल्स का इस्तेमाल करके उन्हें प्रोसेस करता है. ये मॉडल्स सैंपल में मौजूद जटिल और नॉन-लीनियर पैटर्न्स को देखकर किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाते हैं और मिलावट के स्तर के बारे में सटीक नतीजे देते हैं.

फूड केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध

प्रतिष्ठित फूड केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित यह शोध एनआइटी राउरकेला के फूड प्रोसेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो सुशील कुमार सिंह (असिस्टेंट प्रोफेसर), दिवंगत प्रो पूनम सिंघा और एम-टेक ग्रेजुएट ऋषभ गोयल द्वारा किया गया है. शोध टीम ने विकसित तकनीक के लिए ‘खाद्य पदार्थों में मिलावट का पता लगाने और उसकी मात्रा निर्धारित करने की विधि और प्रणाली’ (मेथड एंड सिस्टम फॉर डिटेक्टिंग एंड क्वांटिफाइिंग एडल्टरेशन इन फूड स्टफ) शीर्षक से एक पेटेंट (पेटेंट संख्या: 581403; आवेदन संख्या: 202431050538) भी हासिल किया है.

खाद्य उद्योग की एक चुनौती हल करने पर केंद्रित है आविष्कार : प्रो सिंह

एनआइटी राउरकेला के फूड प्रोसेस इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रो सुशील कुमार सिंह ने कहा कि हमारा आविष्कार खाद्य उद्योग की एक लंबे समय से चली आ रही चुनौती को हल करने पर केंद्रित है. यह नवाचार न केवल खाद्य सुरक्षा और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि पूरी आपूर्ति शृंखला में उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ायेगा. अगले कदम के तौर पर, रिसर्च टीम का लक्ष्य उद्योग जगत के भागीदारों के साथ मिलकर पायलट-स्केल अध्ययन करना और वास्तविक दुनिया की परिस्थितियों में इस सिस्टम को प्रमाणित करना है. इसके अलावा, वे अलग-अलग परिस्थितियों में प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं, ताकि इसकी पहचान करने की क्षमता को मसालों से आगे भी बढ़ाया जा सके.

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Published by: Bipin kumar yadav

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