Rourkela News: इनवेंटिव-2026 में एनआइटी के शोधार्थियों ने प्रस्तुत की तीन इनोवेटिव टेक्नोलॉजी

Rourkela News: इनवेंटिव-2026 में एनआइटी की ऑटिज्म पीड़ित बच्चों के लिए एआइ-संचालित रोबोटिक प्रणाली ने लोगों का ध्यान खींचा.

Rourkela News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी), राउरकेला ने इनवेंटिव- 2026 में अपनी मजबूत इनोवेशन और रिसर्च क्षमताओं का प्रदर्शन किया. यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रमुख वार्षिक आरएंडडी मेला है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी नवोन्मेष को प्रदर्शित करना और ‘रिसर्च-से-टेक्नोलॉजी’ इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है.

आगंतुकों और विशेषज्ञों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली

आइआइटी (आइएसएम) धनबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के प्रमुख आइआइटी, एनआइटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थान एक साथ आये, ताकि छात्रों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी द्वारा विकसित अत्याधुनिक रिसर्च, उद्योग के लिए तैयार टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव समाधानों को प्रदर्शित किया जा सके. इनवेंटिव-2026 में भाग लेते हुए एनआइटी की टीमों ने विभिन्न विषयों से जुड़ी तीन इनोवेटिव टेक्नोलॉजी प्रस्तुत कीं, जो उनकी अंतर्विषयक रिसर्च क्षमताओं को दर्शाती हैं. प्रदर्शनी में इस भागीदारी को आगंतुकों और विशेषज्ञों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली. इस कार्यक्रम में अपनी मजबूत उपस्थिति के माध्यम से एनआइटी, राउरकेला ने नवाचार, अनुसंधान को व्यावहारिक रूप देने और भारत के बढ़ते प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में अपने योगदान के क्षेत्र में अपने नेतृत्व को प्रदर्शित किया.

प्रो नंदी की परियोजना एएसडी बच्चों को सिखाती है सामाजिक कौशल

‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के विषय के तहत ‘ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए एआइ-संचालित सहायक रोबोटिक प्रणाली’ शीर्षक परियोजना को प्रो अनूप नंदी (कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग) द्वारा प्रदर्शित किया गया. यह परियोजना सीएआरएटी (केयरगिवर ऑटिज्म रोबोट विद एआइ-टेक) है. यह एएसडी बच्चों की गतिविधियों का अवलोकन कर हाव-भाव से सामाजिक कौशल सिखाती है. थेरेपी केंद्रों, कक्षाओं व घरों के लिए डिजाइन इस परियोजना को भारतीय पेटेंट प्राप्त है.

कंडक्टिव क्रिएशन्स से उत्पादन होता है तेज, सस्ता और स्वदेशी

सामग्री विज्ञान के विषय क्षेत्र के तहत ‘कंडक्टिव क्रिएशन्स : इलेक्ट्रोकेमिकल अनुप्रयोगों के लिए 3डी प्रिंट करने योग्य संवाहक सामग्री’ शीर्षक वाली परियोजना को प्रदर्शित किया गया. ये विशेष, कस्टम-निर्मित संवाहक सामग्री हैं, जिन्हें सर्किट, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे बनाने के लिए लेपित (कोटेड), लिखा या 3डी प्रिंट किया जा सकता है. इससे उत्पादन तेज, सस्ता और स्वदेशी हो जाता है. इसकी प्रबल व्यावसायीकरण क्षमता के कारण, इस शोध ने पहले ही ‘कंडक्टिव क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक स्टार्टअप को जन्म दिया है, जिसे एफटीबीआइ-एनआइटी राउरकेला में इनक्यूबेट किया गया है. इस परियोजना टीम में रसायन इंजीनियरिंग विभाग के प्रो अधिदेश एस कुमावत और सिंगुरु राजेश (पीएचडी शोधार्थी) तथा डॉ दिशा वर्मा (सह-संस्थापक-कंडक्टिव क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड) शामिल हैं.

सार्थक और व्यक्तिगत जुड़ाव सुनिश्चित करता है सो कनेक्ट

प्रो पंथादीप भट्टाचार्जी (कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग) द्वारा विकसित ‘सो-कनेक्ट’ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण है. यह पारंपरिक ‘फ्रेंड्स ऑफ फ्रेंड्स’ या ‘जियो-टैग’ जैसे टोपोलॉजिकल तरीकों के बजाय उपयोगकर्ता की रुचियों और जुड़ाव के पैटर्न पर आधारित है. एसएनएन-डीबीएससीएएन तकनीक का उपयोग करते हुए यह सिस्टम शिक्षा, खेल और जीवनशैली जैसे विभिन्न क्षेत्रों में साझा पसंद वाले उपयोगकर्ताओं को लेयर-वार समूहों में विभाजित करता है. इसका मुख्य उद्देश्य केवल नेटवर्क विस्तार करना नहीं, बल्कि सार्थक और व्यक्तिगत जुड़ाव सुनिश्चित करना है. यह नवाचार ऑनलाइन नेटवर्किंग को अधिक प्रासंगिक और व्यवस्थित बनाकर सामाजिक मेलजोल के भविष्य को नयी दिशा प्रदान करता है.

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By BIPIN KUMAR YADAV

BIPIN KUMAR YADAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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