Bhubaneswar News: बीजद सुप्रीमो और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने गुरुवार को ओडिशा के सभी सांसदों से राज्य के राजनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ने की अपील की, जो उनके अनुसार परिसीमन विधेयक के कारण खतरे में हैं. पटनायक ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने राज्य के सांसदों से 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक का उसके मूल स्वरूप में विरोध करने का आह्वान किया. नवीन ने राज्य के सभी सांसदों को लिखे पत्र में कहा कि इस संशोधन के लागू होने पर लोकसभा में ओडिशा की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत हो सकती है. उनके अनुसार, इससे राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की आवाज कमजोर होगी और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की क्षमता प्रभावित होगी.
महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने की मांग की
नवीन ने कहा कि प्रस्तावित 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक अपने घोषित उद्देश्य से परे गंभीर चिंताएं पैदा करता है. बीजद के छह राज्यसभा सदस्यों के अलावा, पटनायक ने भाजपा के 23 सांसदों (20 लोकसभा और तीन राज्यसभा) और कांग्रेस के एक सांसद और एक निर्दलीय सांसद को भी पत्र भेजे हैं. पटनायक ने पत्र में लिखा, मैं आपको न केवल बीजद अध्यक्ष के रूप में, बल्कि ऐसे ओड़िया नागरिक के रूप में भी लिख रहा हूं, जो हमारे प्रिय राज्य ओडिशा के दीर्घकालिक हितों, गरिमा और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. यदि संसद द्वारा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित हो जाता है, तो इन सभी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचने की आशंका है. पटनायक ने कहा कि मैं आप सभी से, चाहे आप किसी भी दल से हों, इस (131) संशोधन के व्यापक निहितार्थों पर ध्यानपूर्वक विचार करने का आग्रह करता हूं. यह अनिवार्य है कि हम स्पष्टता, सुरक्षा उपाय और यदि आवश्यक हो, तो परिसीमन प्रक्रिया से महिलाओं के आरक्षण को अलग करने का प्रयास करें.
सांसदों से संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया
ओडिशा के सांसदों को लिखे तीन पन्नों के पत्र में पटनायक ने सांसदों से संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के कारण ओडिशा के लोकसभा क्षेत्र में सीटों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, यह सुनिश्चित करना सभी सांसदों का कर्तव्य है. ओडिशा में वर्तमान में 21 लोकसभा सीटें हैं (कुल 543 सीटों का लगभग 3.9 प्रतिशत). हालांकि, प्रस्तावित विस्तार के तहत सीटों की संख्या लगभग 850 तक बढ़ सकती है, जिससे प्रदेश में सीटों की संख्या 29 हो जायेगी, लेकिन आनुपातिक हिस्सेदारी घटकर 3.4 प्रतिशत हो सकती है, जो लगभग 0.5 प्रतिशत की सापेक्ष गिरावट है. उन्होंने कहा कि संसद में राज्य के मात्र 3.9 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को देखते हुए 0.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का नुकसान बहुत बड़ा है. पटनायक ने कहा कि ओडिशा के लोगों के लिए संसद में प्रतिनिधित्व केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह पहचान, गौरव और इस बात का आश्वासन है कि हमारे विशिष्ट इतिहास, भाषा और आकांक्षाओं को उच्चतम स्तर पर सुना जायेगा.
