Rourkela News: एमएसएमइ टेक्नोलॉजी सेंटर से हर साल 6000 युवाओं को प्रशिक्षण देने की थी योजना, परियोजना ठंडे बस्ते में

Rourkela News: राउरकेला में प्रस्तावित एमएसएमइ टेक्नोलॉजी सेंटर आठ साल से फाइलों में सिमटा है. इस परियोजना में कोई प्रगति नहीं हुई है.

Rourkela News: राउरकेला में स्थानीय उद्यमों को आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी मदद और कौशल प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से प्रस्तावित एमएसएमइ टेक्नोलॉजी सेंटर आठ सालों से महज फाइलों में सिमटा हुआ है. जगदा में सीडब्ल्यूएस अस्पताल के सामने इसके लिए आवंटित जमीन पर केवल एक बोर्ड लगा हुआ है. इसके आगे काम नहीं बढ़ सका है. राउरकेला में एमएसएमइ सेंटर का सपना कब साकार होगा, इसको लेकर भी संशय बरकरार है.

राज्य सरकार ने कांटाझरण में उपलब्ध करायी है 14.45 एकड़ जमीन

राउरकेला में एमएसएमइ सेंटर की स्थापना कर आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले में हर साल लगभग 6,000 युवाओं को प्रशिक्षित करके कुशल कामगारों का एक मजबूत समूह तैयार करने की योजना थी. ओडिशा सरकार ने पहले ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-राउरकेला (एनआइटी) से सटे कांटाझरण में 14.45 एकड़ से ज्यादा जमीन इस परियोजना के लिए उपलब्ध करा दी थी. लेकिन इसमें आगे कोई काम नहीं हो पाया.

शहर के विकास के लिए बेहद जरूरी है यह केंद्र

इस सेंटर का काम पूरा होने की स्थिति में इलाके की पूरी तस्वीर बदल जाती. सेंटर में सालाना छह हजार से अधिक युवकों को प्रशिक्षित करने की योजना है, लिहाजा यहां पर विद्यार्थियों की आवाजाही के साथ ही स्थानीय बाजारों पर भी इसका असर पड़ता. लेकिन इस पर काम आगे बढ़ नहीं पाया है. सामाजिक कार्यकर्ता बिमल बिशी इस सिलसिले में लगातार केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम व संबंधित विभाग के पास पत्र लिखकर मांग कर रहे हैं कि केंद्र को जल्द शुरू किया जाये. उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए यह केंद्र बेहद जरूरी है.

संसद में भी उठ चुका है मामला, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की हुई थी मांग

मार्च 2025 में लोकसभा में नवरंगपुर सांसद बलभद्र मांझी के एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय एमएसएमइ राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया था कि 20 में से 13 टेक्नोलॉजी सेंटरों के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) और भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेज तैयार कर लिये गये हैं और सक्षम प्राधिकारी से इनकी मंजूरी भी मिल गयी है. इन 13 सेंटरों के लिए जमीन पहले से ही मंत्रालय के कब्जे में थी. नवंबर 2024 में बोलियां आमंत्रित की गयीं, जिसमें राउरकेला सहित 13 जगहों पर इन सेंटरों की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गये थे. यदि निजी क्षेत्र की कंपनियों से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो इन सेंटरों को स्वायत्त मोड में स्थापित किया जायेगा. नवरंगपुर सांसद बलभद्र मांझी ने इस प्रोजेक्ट को तेजी से लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की गुहार भी लगायी थी. प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर बताया कि इस टेक्नोलॉजी हब को नवंबर 2018 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने एमएसएमइ मंत्रालय के टेक्नोलॉजी सिस्टम प्रोग्राम के तहत मंजूरी दी थी. पूरे देश में स्थापित किये जाने वाले 20 नये टेक्नोलॉजी सेंटरों में से एक के तौर पर राउरकेला को चुना गया था. मंजूरी मिले सात साल बीतने के बावजूद इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.

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By BIPIN KUMAR YADAV

BIPIN KUMAR YADAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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