Rourkela News: उदितनगर स्थित खेल मैदान केवल दो राष्ट्रीय त्योहार गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने से लेकर परेड व सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां पर नवोदित खिलाड़ी क्रिकेट, फुटबॉल व एथलेटिक्स आदि खेलों में अपने आप को पारंगत करने के लिए नियमित तौर पर सुबह व शाम अभ्यास करने आते हैं. इन खिलाड़ियों को उचित मार्गदर्शन तथा उनकी प्रतिभा को तराशने के लिए इन खेलों से जुड़े कोच भी यहां आते हैं. लेकिन इनके लिए यहां सुविधाओं का अभाव है.
टूटी-फूटी हालत में है पानी पीने के लिए लगा नल
उदितनगर मैदान में सुबह व शाम के समय वाकिंग करने के लिए महिला-पुरुष से लेकर युवाओं की टोली भी पहुंचती हैं. लेकिन यहां पर बुनियादी खेल संरचना से लेकर बुनियादी सुविधाओं का नितांत टोटा है. इसके प्रति ध्यान देनेवाला कोई नहीं है. यहां पानी का नल लगा है, लेकिन वह टूटी-फूटी हालत में है. शौचालय में लगी लाइट भी किसी ने चुरा ली है. पानी के नल के पास गंदगी पसरी पड़ी है. शौचालय का दरवाजा टूटा हुआ है तथा पुरुष व महिला खिलाड़ियों के लिए बने चेजिंग रूम में ताला लटक रहा है.
खेलो इंडिया व फिट इंडिया का स्लोगन बेअसर
वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा नीत राजग सरकार को सत्ता मिलने के बाद खेल व खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के साथ बुनियादी खेल संरचनाओं को विकसित करने के लिए खेलो इंडिया से लेकर फिट इंडिया कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके तहत देश भर में कई खेल प्रतियोगिताओं से लेकर फिटनेस पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है. विगत दो साल से सूबे में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने से उम्मीद जगी थी कि यहां पर भी खेलो इंडिया व फिट इंडिया को लेकर खेल प्रतियोगिताएं व जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करने के साथ बुनियादी खेल संरचना को विकसित करने को लेकर पहल होगी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है. खासकर शहर के हृदय स्थल पर उदितनगर में खेल मैदान की दयनीय हालत देखकर यही आभास हो रहा है.
समस्याओं के समाधान पर ध्यान दे प्रशासन
उदितनगर मैदान में वॉकिंग करने के लिए आने वाले स्थानीय लोगों ने प्रशासन से समस्याओं के समाधान की मांग की. मनोज कुमार नायक ने कहा कि यहां पर खेलों का अभ्यास करने के लिए प्रत्येक दिन सुबह व शाम के समय खिलाड़ी पहुंचते हैं. लेकिन यहां पर चेजिंग रूम बंद रहने से लेकर शौचालय टूटा-फूटा होने के साथ-साथ पीने तक के पानी की उचित सुविधा नहीं है. जिससे खिलाड़ियों से लेकर यहां सैर के लिए आनेवाली आम जनता भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. प्रशासन को इसका समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए.वहीं, अजय कुमार पंडा ने कहा कि सरकार की ओर से खेलो इंडिया व फिट इंडिया का राग अलापा जाता रहता है. लेकिन खेल के लिए बुनियादी संरचना का निर्माण कैसे हो, खिलाड़ियों को मौलिक सुविधाएं कैसे मिल पायेंगी, इस पर किसी का ध्यान नहीं है. उदितनगर मैदान की दयनीय हालत देखकर तो यही प्रतीत होता है.
