Bhubaneswar News: एम्स भुवनेश्वर में महिला के हाथ से सात किलो का ट्यूमर निकाला गया
Bhubaneswar News: एम्स भुवनेश्वर के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक महिला के हाथ से सात किलो का ट्यूमर निकाला है.
Bhubaneswar News: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भुवनेश्वर के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक जटिल और दुर्लभ शल्य चिकित्सा में 47 वर्षीय महिला के बाएं हाथ से लगभग सात किलोग्राम वजन का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक हटाया है. यह ट्यूमर पिछले तीन दशकों से महिला के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा था.
बारीपदा की महिला मरीज 30 वर्षों से थी परेशान
मयूरभंज जिले के बारीपदा की निवासी यह महिला लगभग 30 वर्षों से अपने बाएं हाथ में एक बड़े, लटकते हुए सूजन से पीड़ित थी, जो समय के साथ लगातार बढ़ता गया और गंभीर विकलांगता का कारण बन गया. ट्यूमर के बढ़ने से न केवल उनके कंधे और हाथ की गति सीमित हो गयी, बल्कि दैनिक कार्य भी अत्यंत कठिन हो गये. लंबे समय तक दबाव के कारण प्रभावित त्वचा काली पड़ गयी और उसमें घाव भी विकसित हो गये थे. डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफाइब्रोमा का था, जो एक दुर्लभ और अत्यधिक रक्तवाहिनी युक्त ट्यूमर है. प्री-ऑपरेटिव जांच में लगभग 45 सेंटीमीटर लंबे इस घाव में अत्यधिक रक्तस्राव का जोखिम पाया गया, जिससे सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण हो गयी. जटिलता को देखते हुए, सर्जरी को दो चरणों में पूरा किया गया. पहला ऑपरेशन छह घंटे तक चला, जिसमें ट्यूमर का अग्र भाग हटाया गया. छह महीने बाद दूसरे चरण की सर्जरी की गयी, जिसमें लगभग तीन घंटे में शेष प्रभावित हिस्से को हटाया गया.
एम्स के निदेशक ने मरीज के लिए नये जीवन की शुरुआत बताया
एम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक डॉ आशुतोष विश्वास ने चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए इस सफल सर्जरी को मरीज के लिए ‘नये जीवन की शुरुआत’ बताया. सर्जरी टीम में डॉ संजय कुमार गिरि, डॉ श्याम सुंदर बेहेरा, डॉ आहाना बंद्योपाध्याय, डॉ सूर्य यशस्वी पीवीएस, डॉ कीर्ति जी, डॉ निखिल कुमार शर्मा और डॉ आशुतोष अधिकारी शामिल थे. एनेस्थीसिया विभाग से डॉ देवीश्री दास और डॉ पूजा ने सहयोग प्रदान किया. सर्जरी के दौरान उन्नत तकनीक जैसे लीगाश्योर उपकरण और बाह्य सीलिंग तकनीक का उपयोग किया गया. ट्यूमर हटाने के बाद, प्रभावित क्षेत्र की पुनर्निर्माण प्रक्रिया में निकाले गये ऊतक से प्राप्त त्वचा ग्राफ्ट का उपयोग किया गया, जिससे शरीर के अन्य हिस्सों में अतिरिक्त घाव नहीं बने. डॉक्टरों के अनुसार, ग्राफ्ट सफलतापूर्वक स्थापित हो चुके हैं और मरीज की स्थिति स्थिर है. नियमित देखभाल के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है, जिससे उनके जीवन में एक नयी शुरुआत हुई है.