Jharkhand News : झारखंड के 90 वर्ष के बुजुर्ग को परिजनों ने मुंबई ले जाकर छोड़ा, पढ़िए कैसे दम तोड़ते रिश्ते को मायानगरी में मिला अजनबी का साथ

Jharkhand News, Koderma News, कोडरमा (विकास कुमार) : बुढ़ापा जीवन का अंतिम पड़ाव है और इस पड़ाव में जीवन असक्त हो जाता है. कार्य करने की क्षमता कमजोर हो जाती है. भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है. यही निर्भरता वृद्धों के लिए समस्याओं कारण है. शारीरिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर होने पर उनके बेटा, बेटी, बहू सभी के लिए वे बोझ सा हो जाते हैं. आज की युवा पीढ़ी यह भूल जाती है कि कल यही अवस्था खुद की होने वाली है. आये दिन सोशल मीडिया में मां-बाप को लेकर कई अच्छी अनमोल बातें, स्टेटस, गाने और वीडियो भरे पड़े हैं, परंतु हकीकत इससे परे हैं. कुछ ऐसा ही एक मामला कोडरमा में प्रकाश में आया है. जहां एक बुजुर्ग को उसके परिजनों ने बोझ समझकर मुंबई ले जाकर छोड़ दिया. पत्रकारों की मदद से वह वापस अपने घर गिरिडीह लौट सके.

Jharkhand News, Koderma News, कोडरमा (विकास कुमार) : बुढ़ापा जीवन का अंतिम पड़ाव है और इस पड़ाव में जीवन असक्त हो जाता है. कार्य करने की क्षमता कमजोर हो जाती है. भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है. यही निर्भरता वृद्धों के लिए समस्याओं कारण है. शारीरिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर होने पर उनके बेटा, बेटी, बहू सभी के लिए वे बोझ सा हो जाते हैं. आज की युवा पीढ़ी यह भूल जाती है कि कल यही अवस्था खुद की होने वाली है. आये दिन सोशल मीडिया में मां-बाप को लेकर कई अच्छी अनमोल बातें, स्टेटस, गाने और वीडियो भरे पड़े हैं, परंतु हकीकत इससे परे हैं. कुछ ऐसा ही एक मामला कोडरमा में प्रकाश में आया है. जहां एक बुजुर्ग को उसके परिजनों ने बोझ समझकर मुंबई ले जाकर छोड़ दिया. पत्रकारों की मदद से वह वापस अपने घर गिरिडीह लौट सके. झारखंड के 90 वर्ष के बुजुर्ग को परिजनों ने मुंबई ले जाकर छोड़ने से जुड़ी हर Breaking News in Hindi से अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ.

गिरिडीह जिले के हीरोडीह थाना के डंगारडीह निवासी 90 वर्षीय नोखलाल साव को उनकी ही बेटी, दामाद और नाती ने मुंबई ले जाकर सिद्धि विनायक मंदिर के पास छोड़ दिया. वहां रोते-बिलखते हुए मीडियाकर्मी शिखा वर्मा और अभिनेता नीरज सिंह राजपूत की उन पर नजर पड़ी. उन्होंने उनका हाल-चाल लिया और उन्हें अपने घर ले आये. वे लोग इन्हें सुरक्षित घर भेजने की कोशिश में जुट गए. उन्होंने गूगल के माध्यम से कोडरमा के एनजीओ की तलाश की. जहां ‘समर्पण’ एनजीओ मिला एवं संपर्क स्थापित कर सारा वाकया साझा किया.

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समर्पण के सचिव इंद्रमणि साहू ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें आप कोडरमा भेज दें और ट्रेन का पूर्ण डिटेल दें, फिर हम उन्हें अपने संरक्षण में लेकर आगे की कार्यवाही करेंगे. तय प्लान के अनुसार उक्त लोगों ने उन्हें टिकट देकर कोडरमा भेज दिया. जहां समर्पण की टीम रात्रि करीब 3 बजे स्टेशन जाकर उन्हें अपने संरक्षण में लिया. कार्यालय लाया. उचित पोषण आहार के बाद उन्हें अपने वाहन से उनके घर तक सकुशल पहुंचाया गया. इस संबंध में संस्था की ओर से हीरोडीह थाना में एक सनहा भी दर्ज कराया गया है. समर्पण के मनीष कुमार लहरी, दीपक कुमार राणा, सन्नी कुमार, इंद्रमणि साहू की लोग प्रशंसा कर रहे हैं.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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