कूनो में अचानक कैसे हो गई चीता 'उदय' की मौत, एक दिन पहले पूरी तरह था स्वस्थ

मध्य प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने यह भी बताया कि दक्षिण अफ्रीका से लाये गये चीता उदय 23 अप्रैल को सिर झुकाकर सुस्त और अस्वस्थ हालत में बैठा था. जब वन्य कर्मी उसके समीप गये तो वो उठकर लड़खड़ाते हुए चलने लगा. इसके बाद उसका काफी इलाज किया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.

Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एक और चीते की मौत हो गयी है. मरने वाले चीते का नाम उदय था. उदय की मौत के बाद वन्य अधिकारी उसके मौत की जांच में जुट गये हैं. अधिकारी ने बताया कि मृत चीता उदय की उम्र छह साल थी. गौरतलब है कि कूनो नेशनल पार्क में अब से कुछ ही दिनों पहले मादा चीता शासा की मौत हो गयी थी. जिसके बाद अब ‘चीता प्रोजेक्ट’ को एक और झटका लगा है.

कूनो नेशनल पार्क में दूसरे चीता उदय की मौत पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने खुद आश्चर्य जताया है. उन्होंने कहा कि जिस चीते की पहले मौत हुई थी, वह यहां आने से पहले ही बीमार था, उसे किडनी की समस्या थी. लेकिन दूसरा चीता की मौत बहुत ज्यादा दुखद है. हम उसकी मौत के पीछे का कारण जानना चाहते हैं.

तमाम इलाज के बाद भी  नहीं बचा ‘उदय’: मध्य प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने यह भी बताया कि दक्षिण अफ्रीका से लाये गये चीता उदय 23 अप्रैल को सिर झुकाकर सुस्त और अस्वस्थ हालत में बैठा था. जब वन्य कर्मी उसके समीप गये तो वो उठकर लड़खड़ाते हुए चलने लगा. सबसे बड़ी बात की एक दिन पहले की निगरानी में उदय स्वस्थ पाया गया था. वहीं, चीते की बीमार पड़ने की सूचना वन्य प्राणी चिकित्सकों को दी गयी, जिसके बाद वहां पहुंची टीम न हर तरीके से उसकी इलाज किया.

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वन्य प्राणी चिकित्सा टीम ने सुबह करीब 11 बजे चीता को बेहोश करने के बाद उसका उपचार शुरू किया था. चीता के स्वास्थ्य को देखते हुए उसे आइसोलेशन वार्ड में आगे की उपचार और निगरानी के लिए रखने का फैसला लिया गया. लेकिन शाम 4 बजे चीता उदय की मौत हो गयी. नर चीता की मौत की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है.

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By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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