मध्यप्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी में भाजपा, अगला मुख्यमंत्री कौन? शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर या कोई नया चेहरा

bjp ready to form government in madhya pradesh भोपाल : मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में सरकार बनाने के लिए चल रही सरगर्मी के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गयी है कि प्रदेश के अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड एवं अन्य राज्यों की तर्ज पर किसी अप्रत्याशित चेहरे को मुख्यमंत्री बनायेगी या पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अथवा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जैसे दिग्गज नेताओं में से किसी एक को कमान सौंपेगी. madhya pradesh, bharatiya janata party, bjp, bjp ready to form government, next chief minister of madhya pradesh, shivraj singh chouhan, narendra singh tomar, thawar chand gehlot, mp ciris, mp politics, mp bjp, kamal nath, congress, digvijay singh

भोपाल : मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में सरकार बनाने के लिए चल रही सरगर्मी के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गयी है कि प्रदेश के अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड एवं अन्य राज्यों की तर्ज पर किसी अप्रत्याशित चेहरे को मुख्यमंत्री बनायेगी या पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अथवा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जैसे दिग्गज नेताओं में से किसी एक को कमान सौंपेगी.

भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी आलाकमान ही इसका फैसला लेगी और बाद में विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी. मालूम हो कि कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में सत्ता के लिए 18 दिन तक चले सियासी उठापटक के बाद मुख्यमंत्री पद से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया. इसके बाद मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा सहित अन्य भाजपा नेताओं ने कहा कि जल्दी ही भाजपा प्रदेश में अपनी सरकार बनायेगी.

कमलनाथ सरकार गिरने के करीब छह घंटे बाद भी भाजपा नेतृत्व यह नहीं बता पाया है कि वह किसके नेतृत्व में सरकार चलायेगी. मुख्यमंत्री किसे बनायेगी, इसको लेकर पार्टी पशोपेश में दिख रही है. हालांकि, 13 साल तक लगातार मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री रहने का इतिहास बना चुके शिवराज सिंह चौहान इस पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. लेकिन, क्या भाजपा आलाकमान एक बार फिर चौहान को मुख्यमंत्री बनने का मौका देंगे. यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है.

भाजपा सूत्रों ने बताया कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा आजकल लिये जा रहे फैसलों को देखते हुए कोई भी यह पूरे विश्वास से नहीं बता सकता कि फलां व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, क्योंकि भाजपा ऐसा निर्णय आजकल कांग्रेस की स्टाइल में ले रही है. उन्होंने कहा, ‘ऐसे मामलों में भाजपा में आश्चर्यजनक फैसले आते हैं. शीर्ष नेतृत्व (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) के आलवा कोई नहीं जानता कि मुख्यमंत्री किसे चुनना है. यहां तक कि गृह मंत्री अमित शाह को भी इसका पता नहीं होता कि किसे कमान सौंपी जायेगी.’

सूत्रों ने बताया, ‘जब मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष का चयन हुआ, तो उस वक्त भी कोई नहीं जानता था कि खजुराहो के सांसद एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्व महासचिव विष्णु दत्त शर्मा को मध्यप्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया जायेगा. इस बार मुख्यमंत्री के लिए भी कोई आश्चर्य में डालने वाला नाम हो सकता है.’

उन्होंने कहा कि चौहान के अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं. गहलोत के करीबी सूत्र ने बताया, ‘गहलोत कभी कुछ नहीं मांगेंगे, लेकिन जो दायित्व उन्हें सौंपा जायेगा, उसे निभायेंगे. वह संघ के साथ-साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए भी अनुकूल हैं. वह संगठन के आदमी हैं और इससे पूर्व वह पार्टी महासचिव तथा दिल्ली और गुजरात में पार्टी प्रभारी के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं.’

सूत्र ने आगे जोड़ा, ‘गहलोत अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से ताल्लुक रखते हैं. इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री बनाने से एससी समुदाय के लोगों में भाजपा के लिए सकारात्मक संदेश देगा, जिससे पार्टी को फायदा मिलेगा.’ उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शर्मा ब्राह्मण समुदाय से हैं. पिछड़ा वर्ग से चौहान भी वर्ष 2003 से 2018 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये गये. इससे पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पदों पर राजपूत एवं ब्राह्मण रह चुके हैं. लेकिन, एससी-एसटी वर्ग के लोगों को मध्यप्रदेश में बड़े पद नहीं मिले. इसलिए प्रदेश में एसटी-एससी वर्ग लम्बे समय से अपने समुदाय से मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहा है.

गहलोत के करीबी सूत्र ने बताया कि गहलोत अनुभवी उम्मीदवार भी होंगे, क्योंकि उन्होंने पार्टी में लंबे समय तक विभिन्न पदों पर काम किया है. इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी उनके पास अच्छा खासा अनुभव है. जबलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद और प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मध्यप्रदेश में अगले मुख्यमंत्री का नाम तय करेगा.

श्री सिंह ने कहा कि पार्टी संगठन जिसका भी नाम इस पद हेतु तय करेगा, वह अंतिम होगा. वही प्रदेश का मुख्यमंत्री होगा. मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. इनमें से दो विधायकों (एक कांग्रेस एवं एक भाजपा) के निधन हो जाने से वर्तमान में दो खाली हैं, जबकि कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो चुके हैं. इस प्रकार इस समय केवल 206 विधायक ही रह गये हैं. इनमें से भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों की संख्या 107 है, जबकि कांग्रेस के 92 विधायक हैं. इनके अलावा चार निर्दलीय, दो बसपा एवं एक सपा विधायक हैं. इस समय बहुमत का जादुई आंकड़ा 104 है, जो भाजपा के पास है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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