मैदान-ए-अराफात में आज जुटेंगे दुनिया भर के हाजी, हज की सबसे अहम रुक्न की होगी अदायगी

Hajj 2026: मक्का में लाखों हाजी हज के सबसे अहम रुक्न वुकूफ़-ए-अराफात के लिए मैदान-ए-अराफात में जुटेंगे. इस दिन को इस्लाम में रहमत और दुआओं की कबूलियत का दिन माना जाता है. हाजी नमाज, कुरआन की तिलावत और इबादत में मशगूल रहेंगे. सऊदी सरकार ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

चक्रधरपुर से शीन अनवर की रिपोर्ट

Hajj 2026: सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में मंगलवार को दुनिया भर से आए लाखों हाजी हज के सबसे महत्वपूर्ण चरण “वुकूफ़-ए-अराफात” के लिए मैदान-ए-अराफात में एकत्र होंगे. इस दिन को इस्लाम में रहमत, मगफिरत और दुआओं की कबूलियत का सबसे बड़ा दिन माना जाता है. पूरी दुनिया के मुसलमानों की निगाहें इस समय मक्का और अराफात के मैदान पर टिकी हुई हैं, जहां इंसानियत, अमन और भाईचारे की दुआएं की जाएंगी. इस्लामी मान्यता के अनुसार अराफात का दिन हज का केंद्र बिंदु होता है. अगर कोई हाजी इस दिन मैदान-ए-अराफात में उपस्थित नहीं हो पाता तो उसका हज पूरा नहीं माना जाता. यही वजह है कि इसे हज की सबसे अहम रुक्न कहा जाता है.

क्या है वुकूफ-ए-अराफात का महत्व

हज यात्रा के दौरान अराफात में ठहरने को “वुकूफ-ए-अराफात” कहा जाता है. इस दिन लाखों हाजी एक साथ अल्लाह की बारगाह में अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और दुनिया में शांति, भाईचारे और इंसानियत के लिए दुआ करते हैं. मैदान-ए-अराफात को “जबल-ए-रहमत” यानी रहमत का पहाड़ भी कहा जाता है. इस स्थान का इस्लामी इतिहास में बेहद खास महत्व है. मान्यता है कि यहीं हजरत आदम और बीबी हव्वा की मुलाकात हुई थी. इसी मैदान में पैगंबर मोहम्मद ने अपना ऐतिहासिक आखिरी खुतबा दिया था, जिसे इस्लाम में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

मीना से अराफात की ओर रवाना होंगे हाजी

मंगलवार सुबह से ही हाजी “मीना” से अराफात की ओर रवाना होंगे. अराफात पहुंचने के बाद वे नमाज अदा करेंगे, कुरआन शरीफ की तिलावत करेंगे और पूरे दिन इबादत में मशगूल रहेंगे. लाखों लोग अपने परिवार, समाज और पूरी मानवता के लिए दुआ करेंगे. अराफात के मैदान में दिनभर दुआ, तौबा और इबादत का सिलसिला जारी रहेगा. इस दौरान हाजी अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगेंगे और बेहतर जिंदगी की दुआ करेंगे. इस दिन को रहमतों और बरकतों का दिन माना जाता है.

अराफात के रोजे की भी खास फजीलत

अराफात के दिन दुनिया भर के मुसलमान बड़ी संख्या में रोजा भी रखते हैं. खासकर जो लोग हज पर नहीं जा पाते, वे इस दिन रोजा रखकर इबादत और दुआ में समय बिताते हैं. इस्लामी मान्यता के अनुसार अराफात का रोजा बेहद फजीलत वाला माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन रखा गया रोजा इंसान के पिछले और आने वाले साल के गुनाहों की माफी का जरिया बनता है. यही वजह है कि भारत समेत कई देशों में मुसलमान इस दिन विशेष इबादत करते हैं.

हाजियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम

भीषण गर्मी को देखते हुए सऊदी सरकार ने हाजियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. जगह-जगह ठंडे पानी, मेडिकल कैंप, छायादार टेंट और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की गई है. लाखों हाजियों की आवाजाही को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए विशेष परिवहन सेवा और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. प्रशासन लगातार भीड़ प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी न हो.

मुजदलिफा में बिताएंगे रात

अराफात में वुकूफ़ के बाद शाम को हाजी मुज़दलिफा के लिए रवाना होंगे. यहां वे रात बिताएंगे और शैतान को प्रतीकात्मक रूप से कंकड़ी मारने के लिए पत्थर एकत्र करेंगे. इसके बाद ईद-उल-अजहा के दिन जमरात पर शैतान को कंकड़ी मारने की रस्म अदा की जाएगी. यह हज यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इसके साथ ही कुर्बानी और अन्य धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी.

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पूरी दुनिया की नजर मक्का पर

इस समय पूरी दुनिया के मुसलमानों की भावनाएं मक्का और अराफात से जुड़ी हुई हैं. लाखों लोग टीवी, इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए हज के पवित्र दृश्यों को देख रहे हैं और दुआओं में शामिल हो रहे हैं. अराफात का दिन केवल हाजियों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी उम्मत के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है. यह दिन इंसान को तौबा, सब्र, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है. लाखों हाजी एक साथ जब दुआ के लिए हाथ उठाते हैं तो पूरी दुनिया में अमन और मोहब्बत का पैगाम फैलता है.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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