खुंटपानी से शचींद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Birsa Harit Gram Yojana : पश्चिम सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड अंतर्गत कुस्तुइया गांव के किसान विजय मुंदूइया ने झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना का लाभ उठाकर अपनी बंजर भूमि को आय का स्थायी स्रोत बना दिया है. मनरेगा (एमजीएनरेगा) के तहत संचालित इस योजना का उद्देश्य खाली और बंजर भूमि पर फलदार पौधों की बागवानी को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को स्थायी रोजगार और आय उपलब्ध कराना है.
बंजर भूमि पर आम बागवानी से मिली नई आजीविका
करीब 5 साल पहले विजय मुंदूइया ने योजना के तहत 120 आम के पौधे प्राप्त किए थे. 1 एकड़ बंजर भूमि पर इन पौधों को लगाया गया. समय के साथ पौधे विकसित होकर अब फल देने योग्य हो गए हैं. रोजगार के सीमित अवसरों के बीच उन्होंने बागवानी को आजीविका का साधन बनाया और आर्थिक समस्याओं का समाधान खोजा.
आम की बिक्री से हर साल 1.5–2 लाख की आय
विजय मुंदूइया ने बताया कि आम के फलों की बिक्री से उन्हें प्रतिवर्ष डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक की आय हो जाती है. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बेहतर ढंग से हो पा रही है.
डीप बोरिंग से खेती विस्तार पर जोर
किसान की बागवानी का निरीक्षण करने के लिए खूंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा और प्रखंड विकास पदाधिकारी धनंजय पाठक कुस्तुइया गांव पहुंचे. इस दौरान विजय मुंदूइया ने डीप बोरिंग लगाने का प्रस्ताव रखा, जिससे बंजर भूमि पर साग-सब्जी की खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सके. प्रखंड विकास पदाधिकारी धनंजय पाठक ने मनरेगा के तहत डीप बोरिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया.
बंजर भूमि से सफलता की मिसाल
प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने विजय मुंदूइया को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रोजगार की कमी के बावजूद उन्होंने पलायन का रास्ता नहीं चुना और अपनी बंजर भूमि को मेहनत और लगन से उपजाऊ बनाकर आर्थिक स्थिति को मजबूत किया. उन्होंने कहा कि आज विजय मुंदूइया लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गए हैं.
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