1000 में 35 नवजात की हो जाती है मौत

शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कार्यशाला चाईबासा : नवजात शिशु देखभाल व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग व यूनिसेफ की अोर से बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल के सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ हिमांशु भूषण बरवार ने की. कार्यशाला में […]

शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कार्यशाला

चाईबासा : नवजात शिशु देखभाल व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग व यूनिसेफ की अोर से बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल के सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ हिमांशु भूषण बरवार ने की. कार्यशाला में पहले दिन मनोहरपुर, बंदगांव, सोनुवा व गोइलकेरा प्रखंड के सहिया व बीटीटी को नवजात शिशुओं को होने वाली विभिन्न बीमारियां एवं उनकी देखभाल करने की विस्तृत जानकारी दी गयी.
साथ ही गंभीर रूप से बीमार नवजातों की पहचान कर स्पेशल केयर न्यू बर्न यूनिट में रेफर करने का निर्देश दिया गया. सिविल सर्जन डॉ बरवर ने कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात एवं कम वजन के नवजातों को तुरंत सदर अस्पताल स्थित स्पेशल केयर न्यू बर्न यूनिट में रेफर कर देना है, ताकि उनकी उचित देखभाल हो सके. यूनिसेफ के समन्वयक अनिल कुमार ने नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को लेकर बताया कि जिले में एक हजार में 35 नवजातों की मौत हो जाती है.
उन्होंने कहा कि समय से पूर्व प्रसव होने की नवजात शिशुओं की मृत्यु दर 24 प्रतिशत है. इसका मुख्य कारण है कि कम उम्र में शादी करना व महिलाएं खान-पान में विशेष ध्यान नहीं देने आदि है. उन्होंने कहा कि नवजात में हाइपोथिरिया व पीलिया खतरे का लक्षण है. इस अवसर पर जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ हरिपाल सोनार, प्रभारी जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ संजय कुजूर समेत काफी संख्या में सहिया व बीटीटी उपस्थित थे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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