चाईबासा : प्रशासन व लोगों की जागरूकता से ही बाल-विवाह को रोका जा सकता है. तभी हमारी बेटियों का भविष्य सुरक्षित व उज्जवल होगा. जागरुकता के कारण
बुधवार को मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक बाल-विवाह होने से बच गया.दुम्बीसाई इलाके में 29 अप्रैल को बाल विवाह की तैयारी चल रही थी. विवाह राजनगर में तय किया गया था. इस संबंध में सूचना मिलने के बाद परिजनों को समझाने व बाल विवाह के रोकने के लिये बीडीओ मुकेश मछुआ, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष विकास दोदराजका, सदस्य सुमित विश्वकर्मा, संजय बिरूआ, ज्योत्सना तिर्की, बाल संरक्षण ईकाई के कृष्णा कुमार तिवारी, चाइल्ड लाइन के श्रावणी सिन्हा, आशा कुमारी, दशमथ बेहरा, विशेष बाल पुलिस इकाई संयुक्त रूप से पहुंची थी.
परिवार को समझा बुझाकर विवाह को टालने को कहा गया. इसके साथ ही नाबालिग के शिक्षण की व्यवस्था की गयी. परिवार वालों को बात समझ में आयी और वे बच्ची के बालिग होने तक विवाह नहीं करने का वचन दिया. परिवार वालों को बताया गया कि कम उम्र में विवाह होने से शारीरिक विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है. जिससे गर्भावस्था में माता और बच्चे की जान को खतरा रहता है. बच्चे का समुचित विकास न होने से शिशु मृत्यु दर की आशंका बनी रहती है. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में इस तरह के विवाह करने पर विवाह में शामिल लोगों, रसोइया, टेंट वाले, पंडित (जो शादी कराते हैं) पर भी सजा व जुर्माना का प्रावधान है.
29 को होनी थी शादी, पूरी थी तैयारी
मुफस्सिल थाने के दुंबीसाइ का मामला
प्रशासन ने नाबालिग की शिक्षण व्यवस्था की
