स्थानीयता नीति बाहरी नीति है : जेडीपी

चाईबासा : भाजपा सरकार की ओर से लागू स्थानीय नीति बाहरी नीति है. जो कि आदिवासियों के पक्ष में नहीं है. उक्त बातें मंगलवार को चाईबासा घड़ी घर के समीप झारखंड दिशोम पार्टी(जेडीपी) की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला उपाध्यक्ष कुशनू कोड़ा ने कही. बैठक में स्थानीय नीति का विरोध किया गया. जेडीपी […]

चाईबासा : भाजपा सरकार की ओर से लागू स्थानीय नीति बाहरी नीति है. जो कि आदिवासियों के पक्ष में नहीं है. उक्त बातें मंगलवार को चाईबासा घड़ी घर के समीप झारखंड दिशोम पार्टी(जेडीपी) की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला उपाध्यक्ष कुशनू कोड़ा ने कही. बैठक में स्थानीय नीति का विरोध किया गया. जेडीपी ने तृतीया एवं चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों को प्रखंडवार कोटा बनाकर प्रखंड के आवेदक द्वारा ही भरे जाने की मांग की.

साथ ही 30 वर्ष के स्थानीयता दायरे को बढ़ाकर 50 वर्ष करने की मांग की. बैठक में सूबेदार बिरुवा, शिबू पूर्ति, विनोद गोप, गुरा सिंकू, सिकंदर बिरुली, जय देवगम, राजेश बिरुली, प्रफुल्ला अल्डा, सिदिऊ बिरुवा, पूर्णचंद्र दोराईबुरु, शंकर सवैंया, जयराम दोराईबुरु, संजय सवैंया आदि कई अन्य लोग उपस्थित थे. झामुमो ने केवल सत्ता का सुख भोगा : स्थानीय नीति पर झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो) के विरोध पर कोड़ा ने कहा कि झामुमो का विरोध झारखंडी जन भावनाओं को शोषण एवं वोट बैंक मात्र है.

झामुमो ने इसी मुद्दे को कारण बताकर भाजपा की सरकार को तोड़कर अपनी सरकार बनायी थी. मगर स्थानीय नीति के नाम पर आदिवासियों को सिर्फ ठगते रहे. झामुमो का 1932/1964 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाने की मांग कर रही है जो कि अव्यावहारिक है.

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