चक्रधरपुर : गर्मी में मटके का पानी पीने का मजा ही कुछ और है. घर में भले ही फ्रीज हो पर फ्रीज से कहीं अधिक मटके का पानी सुकून देता है. यहीं वजह है कि लोगों के घरों में फ्रीज होने के बावजूद मटका का पानी पीना ही पसंद करते हैं. इसलिये मटके की जरुरत आज भी बनी हुयी है. इस साल मटके की कीमत में बढ़ोतरी हुयी है.
मध्यम आकार के मटके की कीमत 55 से 60 रुपये, वहीं बड़े आकार के मटके की कीमत 100 से 120 रुपये तक है. छोटे साइज का मटका भी 40 से 50 रुपये में बिक रहा है. सुराही की कीमत तो और अधिक है. कुम्हारों का कहना है कि मेहनत की तुलना में मटके की कीमत कम है. मटका बनाने से लेकर बाजार में पहुंचाने तक उन्हें जो मेहनत लगती है, उसकी तुलना में कीमत महंगाई के इस दौर में कुछ भी नहीं. मिट्टी चालन, चौक में मिट्टी को मटके का आकार देना,
उसे पकाना इन सब कार्यों में काफी समय व मेहनत लगती है. मटका तैयार हो जाने के बाद उसे कंधे से ढोकर बाजार तक लाया जाता है. वैसे ठंडे पानी में मटके के पानी को ज्यादा शुद्ध और सेहत के लिये बेहतर माना गया है. फ्रीज के पानी में कनकनाहट रहती है. इसकी वजह से जो लोग दांत के सेंसेविटी से परेशान रहते हैं, वे चाहकर भी फ्रीज का पानी नहीं पी पाते. ऐसे लोगों के लिये गर्मी में ठंडे पानी के लिये मटका काफी
उपयुक्त है.
