गुणवत्ता पर सवाल. दो साल में ही 50 डस्टबिन खराब

नप के सड़ गये 17 लाख के डस्टबिन स्वच्छता जागरुकता अभियान के दौरान लोगों को डस्टबिन के सही उपयोग की जानकारी नहीं देने के कारण चाईबासा नगर पर्षद क्षेत्र में रखे गये करीब 17 लाख के डस्टबिन सड़ कर बेकर हो गये. चाईबासा : इस कारण नगर पार्षद ने डस्टबिन को हटा लिया है, लेकिन […]

नप के सड़ गये 17 लाख के डस्टबिन

स्वच्छता जागरुकता अभियान के दौरान लोगों को डस्टबिन के सही उपयोग की जानकारी नहीं देने के कारण चाईबासा नगर पर्षद क्षेत्र में रखे गये करीब 17 लाख के डस्टबिन सड़ कर बेकर हो गये.
चाईबासा : इस कारण नगर पार्षद ने डस्टबिन को हटा लिया है, लेकिन अब सड़कों पर जहां-तहां कचरा दिख रहा है. 2014 में खरीदे गये डस्टबिन नियमत: 2019 तक चलना चाहिए था, लेकिन दो साल में ही डस्टबिन खराब हो गये. नगर पर्षद ने शहर में 50 जगहों पर बड़े डस्टबिन रखे थे. इसमें लोगों की ओर से गीला कचरा डालने व आग लगा देने के कारण 30 डस्टबिन जंग लगकर सड़ गये. फलस्वरूप लाखों के डस्टबीन समय से पहले खराब हो गये.
जालीदार होंगे नये डस्टबिन
इस समस्या से निजात के लिए अब नगर पर्षद डस्टबिनों की मरम्मत कर जालीदार बना रहा है, ताकि गीला कचरा डस्टबिन में जमा न हो पाये. वहीं आग लगने पर भी डस्टबिन को कम नुकसान पहुंचे. प्रयोग के लिए शहर के कई हिस्सों में छह जालीदार डस्टबिन रखे गये हैं. सब कुछ ठीक रहा तो सभी डस्टबिन जालीदार बनाये जायेंगे.
डस्टबिन की मरम्मत पर दो लाख खर्च
नगर पर्षद को प्रत्येक डस्टबीन की खरीदारी पर 55 हजार रुपये देने पड़े थे. वहीं सड़ गये डस्टबिनों की मरम्मत पर नगर पर्षद को लगभग दो लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे. प्रत्येक डस्टबिन की मरम्मत पर छह से आठ हजार रुपये खर्च आने की बात कही जा रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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