अस्पताल प्रबंधन ने दी कानून की दुहाई
चाईबासा : सदर अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता को गुरुवार की सुबह छुट्टी तो दे दी गयी लेकिन उन्हें घर जाने के लिए ममता वाहन नहीं दिया गया. इसके कारण एक दंपत्ती अपने नवजात के साथ घंटों परेशान रहे. जेमा आल्डा को मंगलवार शाम प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था.
अस्पताल प्रबंधक जेम्स सोय तथा जीरेन कांडुल्ना का तर्क था कि जब तक प्रसूता को भर्ती कराने वाली सहिया आकर उसे नहीं ले जाती, तब तक उन्हें ममता वाहन से घर नहीं भेजा जा सकता. क्योंकि नियम के अनुसार ममता वाहन सहिया की उपस्थिति में ही प्रसूता को घर से लाने व वापस घर पहुंचाने जाता है. हालांकि कई बार सहिया के उपस्थित नहीं रहने के कारण फोन पर ही सहिता के कह देने से ममता वाहन जच्चा-बच्चा को घर तक छोड़ आता था. लेकिन अचानक से गुरुवार को प्रबंधन की सख्ती के कारण जेमा आल्डा और उसके नवजात को परेशानी हुई.
मेरा काम मां और बच्चे को घर से लाना और घर तक ले जाने का है. पर प्रबंधन अनुमति नहीं देगी तो इनको घर तक नहीं ले जा सकता.
दिलीप प्रसाद, ममता वाहन का चालक
प्रसूता व नवजात दोनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. अब प्रबंधक सहिया के आने तक ममता वाहन के लिए इंतजार करने को कहते है. अगर ऐसा था तो फिर प्रसूता को कैसे बेड से हटाया गया. सहिया के आने तक तो दोनों को अस्पताल में रहने देना चाहिए था. वरना नियम का क्या मतलब.
सिद्वेश्वर आल्डा बुड़ीऊली (जेमा आल्डा के पति)
