वास्को डि गामा (गोवा) : रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि ओआरओपी की अधिसूचना का विरोध कर रहे पूर्व-सैनिकों का व्यवहार सैनिकों जैसा नहीं है. उन्हें गुमराह किया गया है. पर्रिकर ने उनसे अपने पदक लौटाने के फैसले को वित्तीय मांग से नहीं जोड़ने को कहा. कहा कि वह इस तरह के तरीकों के इस्तेमाल से दुखी हैं.
सैनिकों की सेवा और बहादुरीवाले कार्याें के लिए देश उन्हें पदक देता है. एक वर्ग इसलिए पदक लौटाने पर जोर दे रहा है, क्योंकि कोई ओआरओपी के कुछ प्रावधानों से खुश नहीं है, जिसके लिए सरकार 8000 करोड़ रुपये से अधिक दे रही है. यह अपने आप में पदक की गरिमा को कम करना है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सभी को विरोध का अधिकार देता है, लेकिन पूर्व सैनिकों को अपने पदक नहीं लौटाने चाहिए, जो देश ने उन्हें दिये हैं. यह काम सैन्य अनुशासन के अनुरूप नहीं हैं. उन्होंने ‘वन रैंक वन पेंशन’ के फैसले को पिछले एक साल में अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया. सरकार और मैंने ओआरओपी के वादे को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की है.
