आंखों के सामने दो को भून दिया था

चाईबासा : डोपरोसाई गांव निवासी गुना देवगम इंडियन पीस किपिंग फोर्स (आइपीकेएफ) टुकड़ी के एक सदस्य के रूप में अपनी सेवा भारतीय सेना में दे चुके है. जवानों की सेवा कर वह आज भी अपने को भाग्य मानते है. 16 फरवरी 1997 में सेवानिवृत्य हुए गुना देवगम अपनी पुरानी बातों को याद कर कहते है […]

चाईबासा : डोपरोसाई गांव निवासी गुना देवगम इंडियन पीस किपिंग फोर्स (आइपीकेएफ) टुकड़ी के एक सदस्य के रूप में अपनी सेवा भारतीय सेना में दे चुके है. जवानों की सेवा कर वह आज भी अपने को भाग्य मानते है.
16 फरवरी 1997 में सेवानिवृत्य हुए गुना देवगम अपनी पुरानी बातों को याद कर कहते है कि जब आइपीकेएफ टुकड़ी के एक सदस्य के रूप में श्रीलंका गये तो ऐसा लगता था मौत के मुंह में पहुंच गये. 1988-91 तक श्रीलंका में शांति दूत का पैगाम लेकर पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि हर पल मौत का साया चारों तरफ दौड़ती रहती थी. अपनी जान हाथ में रख कर ड्यूटी करते थे.
काफी दिनों तक घरवालों से भी संपर्क नहीं रहा था. 15 जनवरी भारतीय थल सेवा दिवस के अवसर पर देवगम ने जवानों को अपनी शुभकामना दी है. भारतीय सेना ने जब श्रीलंका 1988 में शांति दूत बनकर एक टुकड़ी गयी थी तो गुना देवगम एक सप्लाई मैन का काम करते थे. भारतीय सेना में सप्लाई मैन में काम कर आज भी गुना देवगम गर्व महसूस करते है. उनका कहना है कि मौका कम लोगों को मिलती है.
लेकिन वह पल आज भी याद करते तो जीवन के हसीन पलों में से एक लगती है. फिलहाल गुना देवगम भूतपूर्व सैनिक संघ के झारखंड अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवा दे रहे है. भूतपूर्व सैनिकों की समस्याओं की हल संघ के माध्यम से आवाज उठा रहे है.

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