चाईबासा : मैं जिनके लिए गाड़ी चलाता हूं, उनका सुबह फोन आया कि तुम्हें कुछ लोगों को लेकर रोरो जाना है. मैं खनन निदेशालय से चार लोगों को लेकर करीब एक बजे रोरो माइंस पहुंचा. वहां सभी को उतारकर मैंने गाड़ी घुमाकर एक पेड़ की छाह में खड़ी कर दी.
तभी पांच से छह हथियारबंद लोग मेरे पास आये और पूछने लगे कौन हैं ये लोग. मैंने कहा, मुङो नहीं मालूम. तो उन लोगों ने मुङो थप्पड़ मारा और कहा कि भागो यहां से. मैंने देखा कि करीब 12 से 15 हथियारबंद लोग उन चारों को घेरे हुए थे. उसके बाद मैं गाड़ी लेकर चाईबासा आ गया. यहां आकर जिन्होंने मुङो भेजा था, उन्हें घटना की जानकारी दी.
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
चाईबासा. घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही अपहृतों के परिजनों का बुरा हाल है. साकेत भारती के घर में अभी उनकी मां सरस्वती देवी और पत्नी रिंकू भारती हैं. सरस्वती देवी ने बताया कि उनका बेटा रोजाना की तरह काम पर गया था. लेकिन दोपहर में जब वह खाना खाने नहीं आया तो मेरी बहू ने उसके दफ्तर जाकर पता किया तो घटना की जानकारी मिली. साकेत भारती का परिवार महानिदेशालय के बगल में ही बने सरकारी आवास में रहता है. घटना की जानकारी मिलने के बाद से इनका रो-रोकर बुरा हाल है. दूसरी ओर, अपहृत ड्राइवर निताई चंद्र सीट का बेटा भी अपने पिता की जानकारी लेने के लिए महानिदेशालय के दफ्तर में पहुंचा हुआ था. लेकिन कोई भी अधिकारी वस्तु स्थिति को स्पष्ट करने में सक्षम नहीं दिखे. एक अन्य अपहृत उपनिदेशक बीबी सतियार का परिवार जमशेदपुर में रहता है.
