पश्चिम सिंहभूम में प्रति एक हजार पुरुषों में महिलाओं की संख्या 1005

चाईबासा: जिले में प्रति एक हजार पुरुषों पर 1005 महिलाएं हैं. इसके बाद खूंटी एवं सिमडेगा जिले का स्थान आता है. खूंटी एवं सिमडेगा में प्रति हजार पुरुषों पर 997 महिलाएं हैं. स्री-पुरुष लिंग अनुपात में सबसे पीछे है धनबाद (909), रामगढ़ (921) और बोकारो (922). शिशु लिंगानुपात में भी पश्चिमी सिंहभूम की स्थित अन्य […]

चाईबासा: जिले में प्रति एक हजार पुरुषों पर 1005 महिलाएं हैं. इसके बाद खूंटी एवं सिमडेगा जिले का स्थान आता है. खूंटी एवं सिमडेगा में प्रति हजार पुरुषों पर 997 महिलाएं हैं. स्री-पुरुष लिंग अनुपात में सबसे पीछे है धनबाद (909), रामगढ़ (921) और बोकारो (922). शिशु लिंगानुपात में भी पश्चिमी सिंहभूम की स्थित अन्य जिलों से बेहतर है.

यहां प्रति एक हजार नवजात शिशुओं में बच्चियों की संख्या 983 है जबकि पाकुड़ में यह संख्या 975, लोहरदगा में 970, बोकारो एवं पूर्वी सिंहभूम में 923 है जबकि धनबाद में (न्यूनतम) 916 है. अनुसूचित जाति के अधिकतम लिंग अनुपात में पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रति हजार पुरुषों पर 1025 महिलाएं हैं. इसके बाद सिमडेगा (1017) एवं सरायकेला-खरसावां (990) तथा न्यूनतम गोड्डा (931), धनबाद (932) एवं देवघर (933) महिलाएं शामिल है.

प्राथमिक जनगणना सार 2011 से संबंधित एक कार्यशाला में जनसंख्या में लिंगानुपात का यह अंतर सामने आया. कार्यशाला का आयोजन बुधवार को टाटा कॉलेज स्थित बिरसा मेमोरियल हॉल में किया गया था. कार्यशाला में कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों के विभिन्न संकाय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे. कार्यशाला का उदघाटन कुलपति डॉ आरपीपी सिंह ने दीप प्रज्‍जवलित कर किया. मौके पर प्रति कुलपति डॉ शुक्ला मोहंती, टाटा कॉलेज की प्राचार्या कस्तूरी बोयपाई, स्नातकोत्तर भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ सुसाना हांसदा, डीएसडब्ल्यू पद्मजा सेन, जनगणना कार्य निदेशालय से डॉ भीमराज हांसदा, सहायक निदेशक प्रदीप कुमार, अन्वेषक आशुतोष कुमार बिसी, बीरेंद्र प्रसाद सिंह एवं नीरज साहू उपस्थित थे.

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