चक्रधरपुर : एक 12 साल के बच्चे ने मात्र दस घंटे के अंतराल में मुकम्मल कुरआन शरीफ जुबानी पढ़ कर सुना दिया. यह एक अदभूत कारनामा है. जिसे अच्छे अच्छे हाफिज-ए-कुआन भी नहीं कर पाते हैं. जानकारी के मुताबिक मदरसा फैजुल कुरआन चक्रधरपुर का विद्यार्थी हाफिज मो अफजल ने यह कारनामा कर दिखाया है.
अपने उस्ताद हाफिज मौलाना खलील साहब की देखरेख में यह कारनामा अंजाम दिया. बानीपोश सरायकेला के अब्दुल कुद्दूस के सुपुत्र मो अफजल चक्रधरपुर में रह कर मदरसा की पढ़ाई कर रहा है. 12 साल की उम्र में ही मो अफजल ने कुरआन को कंटस्थ याद कर लिया है. 19 मई को सुबह चार बजे से उसने अपने उस्ताद को कुरआन सुनाना शुरू किया. 4 से लगातार 11 बजे तक उसने कुरआन पढ़ा. इस दौरान 19 पारा कुरआन सुना डाला. फिर कुछ देर आराम करने के बाद जोहर की नमाज अदा किया.
दोपहर दो बजे से फिर कुरआन पढ़ना शुरू किया और शाम पांच बजे तक मुकम्मल कुरआन सुना डाला. मालूम रहे कि कुरआन में तीन पारे, 6666 आयतें, 114 सूरह और 611 पृष्ठ थे. जिसे हाफिज अफजल ने सुना डाला. हर 15 मिनट में एक पारा कुरआन वह पढ़ता गया. एक घंटे में चार पारा कुरआन सुनाया.मुकम्मल कुरआन सुनाने के बाद मुफ्ती अल्ताफ हुसैन ने सामूहिक दुआ किये.दुआ में हाजी कैसरुज्जमां और मदरसा के बच्चे शामिल थे. मुफ्ती साहब ने कहा कि मो अफजल ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जो हमेशा याद रहेगा.कुरआन एक चमत्कार (मोजेजह) है. जिसे दुनिया में कोई नहीं मिटा सकता.
अल्लाह ने हाफिजों के दिलों में कुरआन को बसा कर रखा है. अल्लाह ने कुरआन की हिफाजत का वादा किया है. उन्होंने हाफिज मो अफजल के उज्जवल भविष्य की कामना की.
