रांची/सिमडेगा. पूर्व मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री विमला प्रधान के निधन के बाद उनके राजनीतिक सफर के साथ सिमडेगा और आसपास के इलाकों के सामाजिक मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता भी याद की जा रही है. विधायक रहते हुए उन्होंने मलहार समाज के भूमिहीन परिवारों के लिए विधानसभा में जमीन बंदोबस्ती का मुद्दा उठाया था. उनके सवाल के बाद सिमडेगा के सदर और केरसई प्रखंड में रहने वाले भूमिहीन मलहार परिवारों की जमीन बंदोबस्ती से संबंधित प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया था.
भूमिहीन मलहार परिवारों की जमीन का मुद्दा उठाया
जुलाई 2019 में सिमडेगा विधायक के तौर पर विमला प्रधान ने विधानसभा सत्र में मलहार जाति के सदस्यों को जमीन आवंटित करने का सवाल उठाया था. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सदर और केरसई प्रखंड में मलहार समाज के कई लोग भूमिहीन थे. सरकारी प्रावधान के तहत ऐसे भूमिहीन परिवारों के लिए जमीन बंदोबस्ती का प्रावधान बताया गया था.
विमला प्रधान के सवाल के बाद संबंधित एसडीओ ने दोनों प्रखंडों के अंचल अधिकारियों को भूमिहीन मलहार परिवारों की जमीन बंदोबस्ती से संबंधित प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया था.
गांवों की बुनियादी समस्याएं भी उठाती रहीं
विमला प्रधान का ग्रामीण इलाकों से जुड़ाव उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन के बाद भी बना रहा. मई 2026 में वह जलडेगा प्रखंड के टिनगिना पंचायत स्थित टिकरा गांव पहुंची थीं और ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं. ग्रामीणों ने उन्हें बिजली, सड़क और पेयजल की समस्याओं से अवगत कराया था. विमला प्रधान ने मौके से बीडीओ से बात कर गांव की स्थिति की जानकारी दी थी.
केलाघाघ रोड की जलजमाव समस्या पर भी की पहल
अगस्त 2025 में सिमडेगा के केलाघाघ रोड पर जलजमाव की समस्या को लेकर भी विमला प्रधान ने पहल की थी. उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर चर्चा की थी. जलजमाव के कारण स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया गया था.
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल में रहीं शामिल
सितंबर 2023 में सिमडेगा में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गयी सॉफ्ट टॉयज मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन भी विमला प्रधान ने किया था. इस पहल में महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का उद्देश्य बताया गया था.
विमला प्रधान 2009 और 2014 में सिमडेगा विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुनी गयी थीं. वह झारखंड सरकार में मंत्री भी रहीं. वर्ष 2017 में उन्हें झारखंड विधानसभा की ओर से उत्कृष्ट विधायक के सम्मान के लिए मनोनीत किया गया था.
उनके निधन के बाद उनके राजनीतिक सफर के साथ ऐसे स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी चर्चा में है, जिनसे सिमडेगा के ग्रामीण और वंचित तबके सीधे जुड़े रहे.
