आज पर्वों का दुर्लभ संगम, एक साथ मनाई जाएगी तीज, गणेश चतुर्थी और चौठ चंद्र

इस वर्ष 14 सितंबर को तिथियों के विशेष संयोग के कारण हरितालिका तीज, गणेश चतुर्थी और मैथिली लोकपर्व चौठ चंद्र एक साथ मनाए जाएंगे। जानें इस शुभ अवसर पर पूजा का सही समय और महत्व।

Haritalika Teej Ganesh Chaturthi Chaoth Chand 2026: हरितालिका तीज, गणेश चतुर्थी व मैथिली भाषी समाज का लोकपर्व चौठ चंद्र सोमवार को है. अमूमन तीज के अगले दिन गणेश चतुर्थी व मैथिली भाषी समाज का लोकपर्व चौठ चंद्र मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष यह एक दिन पहले यानी 14 सितंबर को मनाया जायेगा. इस बार तिथियों के संयोग के कारण तीनों पर्व एक साथ पड़ रहे हैं. पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि इस दिन सुबह 7.18 बजे तक तृतीया है. इसके बाद चतुर्थी लगेगी, जो मंगलवार की सुबह 7.54 बजे तक रहेगी. 14 सितंबर को दिन के 3.16 बजे से पूर्व तक हस्त नक्षत्र मिलेगा. इस कारण इस दिन हरितालिका तीज का व्रत किया जायेगा. वहीं, मध्याह्न काल में चतुर्थी मिलने के कारण इसी दिन गणेश पूजा होगी. इसी दिन रात में चौठ चंद्र का पर्व मनाया जायेगा. चंद्रमा को देखकर अर्घदिया जायेगा. गणेश चतुर्थी व्रत का समापन 25 सितंबर को होगा. इसी दिन अनंत चतुर्दशी का त्योहार है.

नवविवाहितों ने हाथों में रचाई मेहंदी

तीज को लेकर घरों में विशेष तैयारी की गयी है. ससुराल से पूजन सामग्री भी आ गयी है, जिससे वे पूजा करेंगी. नवविवाहिताओं सहित अन्य महिलाओं ने रविवार को मेहंदी लगवायी. त्योहार को लेकर बाजारों में विशेष चहल-पहल देखने को मिली. बाजार में भगवान की मूर्तियों से लेकर साज-सज्जा के सामान और प्रसाद आदि की बिक्री हो रही है. वहीं, मिट्टी के दीये से लेकर अन्य सामान की भी बिक्री हो रही है. इसके अलावा खोवा, पिड़ुकिया सहित अन्य सामानों और बांस की टोकरी की भी बिक्री हो रही है. बाजारों में रौनक, खोवा और पिड़ुकिया की भारी मांग बाजार में खोवा व पिड़ुकिया की बिक्री हो रही है. खोवा 500 से 600 रुपये किलो की दर से बिक रहा है. वहीं, कई लोग बाजार से दूध लाकर घरों में भी खोवा तैयार कर रहे हैं. बाजार में खोवा वाली पिड़ुकिया 350 से 400 रुपये, सूजी व खोवा मिक्स पिड़ुकिया 250 से 300 रुपये, अनरसा खोवा वाला 250 से 300 रुपये और सादा अनरसा 180 से 200 रुपये किलो की दर से बिक रहा है.

पति की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास

महिलाएं अखंड सुहाग की रक्षा के लिए तीज का व्रत करती हैं. दिन भर उपवास रखने के बाद शाम में मां पार्वती और भोले बाबा सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करतीहैं. कई लोग बालू से, तो कई मिट्टी से भगवान की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा करतीहैं. व्रत की कथा सुनतीहैं. अगले दिन सुबह स्नान-ध्यान कर पूजा और भगवान की आरती करती हैं.

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चौठ चंद्र : शाम को अर्घ देकर मांगेंगे सुख-समृद्धि

मैथिली भाषी लोगों का लोकव्रत चौठ चंद्र के दिन दिन भर उपवास रखकर शाम में चंद्रमा को देखकर अर्घदिया जाता है. इसके लिए व्रती दिन से ही तैयारी शुरू कर देती हैं. घरों में विभिन्न पकवान बनाये जाते हैं और इन पकवानों व फलों को घर के आंगन अथवा छत पर अल्पना के बीच रखा जाता है. विभिन्न गीत-नाद के बीच भगवान का ध्यान किया जाता है. चंद्रमा के नजर आते ही उन्हें हाथों में विभिन्न सामग्री लेकर अर्घदिया जाता है. इसके बाद सबकी मंगलकामना के लिए प्रार्थना की जाती है और प्रसाद स्वरूप इसका वितरण किया जाता है.

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लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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