सिमडेगा. सिमडेगा जिले के पाकरटांड़ प्रखंड अंतर्गत कैरबेड़ा पंचायत स्थित राईबेड़ा डैम कॉलोनी के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. दोभाया डैम निर्माण के कारण विस्थापित हुए यहां के लगभग 30 परिवारों के 115 से अधिक लोग वर्षों से पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की आस लगाये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड सरकार की विस्थापन व पुनर्वास नीति के तहत उन्हें बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है. इसके बावजूद सरकारी उपेक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है. सामाजिक कार्यकर्ता अगुस्टीना सोरेंग ने बताया कि गांव के लोगों ने उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर बिजली और पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. इससे पहले भी वर्तमान विधायक को कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि संवेदनशील उपायुक्त ग्रामीणों की समस्या पर जल्द पहल करेंगी. ग्रामीणों की स्थिति यह है कि उन्हें पीने का पानी गांव से लगभग डेढ़ किमी दूर स्थित एक सुनसान नाले से लाना पड़ता है. यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक है, क्योंकि रास्ते में जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों का खतरा बना रहता है. अगुस्टीना सोरेंग ने जिला प्रशासन व राज्य सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में पेयजल और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, ताकि विस्थापित परिवारों को उनका मूलभूत अधिकार मिल सके और वे खुद को उपेक्षित महसूस न करें. ग्रामीण क्लेमेंट सोरेंग, ज्वाकिम किड़ो, रतन टोप्पो, नीलमणि टोप्पो, सुंदरमणि खेस, विनिता कुल्लू, अंजलीना किड़ो, प्रतिमा इंदवार, फिलिसिता इंदवार, विनिता बिलुंग, वरदान टोप्पो, ओरतन टोप्पो, रोशन किड़ो, एलिन किड़ो और समीर इंदवार समेत अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव की मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग की है.
चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं लोग
कैरबेड़ा पंचायत स्थित राइबेड़ा डैम कॉलोनी के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
